शाहखर्ची और रईसी की जीवनशैली किसी भी इनसान को किस स्तर तक गिरा सकती है इसी का नमूना है व्यवसायी अनुराग जायसवाल।
विलासपुर,18 जनवरी 10(36गढ डाट इन) शाहखर्ची और रईसी की जीवनशैली किसी भी इनसान को किस स्तर तक गिरा सकती है इसी का नमूना है व्यवसायी अनुराग जायसवाल।
विलासपुर पुलिस के क्राइम ब्रांच ने अनुराग जायसवाल को भारतीय प्रशासनिक सेवा के फर्जी अधिकारी का रूप धारण कर ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया।
अनुराग जायसवाल पिछले एक वर्ष से इस रूप में लोगों को ठगता था और इसी अवैध कमाई के बलबूते वह ठाठ की जिन्दगी व्यतीत कर रहा था।
विलासपुर जिले में भी वह गरीबी पर एक होटल में गरीबी पर सेमिनार आयोजित किया था और उसने रौब-रूतबा आईएएस अधिकारी का दिखाया था।
उसके इसी रौब-रूतबे के बहुरूपियेपन से आरक्षी अधीक्षक विवेकानन्द को शक हुआ। अनुराग जायसवाल ने अपने बारे में फैला रखा था कि वह 2001 बैच के कर्नाटक कैडर का आईएएस अधिकारी हैं।
एस. पी. विवेकानन्द ने इसी जानकारी के बूते 2001 बैच के आईएएस अधिकारियों की सूची में अनुराग जायसवाल का नाम खोजा जिसमें उसका नाम न पाकर उनका शक सही साबित हुआ।
इसके बाद क्राइम ब्रांच के पदाधिकारी प्रभाकर तिवारी के नेतृत्व में एक टीम गठित कर इस फर्जी आईएएस अधिकारी की गिरफ्तारी का आदेश दिया।
पुलिसिया गिरफ्त में आने के बाद अनुराग जायसवाल ने बताया कि उसकी फिजूलखर्ची और विलासिता की जीवन की आदत की वजह से वह दिवालिया हो गया था और गहरे कर्ज में डूब गया था।
इसी से छुटकारा पाने के लिए उसने आईएएस अधिकारी का बहुरूपिया बन लोगों को ठगना शुरू किया।
उसके पास से दो लाख रुपये भी बरामद हुए जो उसने रायगढ़ के एक व्यवसायी को सरकारी विभाग में उसके एक लम्बित कार्य को पूरा करवा देने के एवज में ठगा था।
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