अनुशासनहीनता के आरोप में बर्खास्त कमर के नीचे लकवाग्रस्त और आंख-कान से भी लाचार यह सिपाही अकेले दम पर अपने अधिकार एवं सम्मान की लड़ाई लड़ता रहा।
रायपुर, 6 दिसम्बर (36गढ डाट इन) सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। इस कथन को चरितार्थ किया छत्तीसगढ़ पुलिस का बर्खास्त विकलांग सिपाही रामकिशोर गौतम ने। दो दशक तक कानूनी जद्दोजहद के बाद छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य की पुलिस को पूरे सम्मान के साथ इनकी सेवा पुनः बहाल करने का आदेश दिया।
अनुशासनहीनता के आरोप में बर्खास्त कमर के नीचे लकवाग्रस्त और आंख-कान से भी लाचार यह सिपाही अकेले दम पर अपने अधिकार एवं सम्मान की लड़ाई लड़ता रहा।
दो दशक तक न्यायालयों का चक्कर लगाने के बाद आखिरकार इन्हें न्याय मिल गया।
रायपुर के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार कहते हैं कि न्यायालय के आदेशानुसार राज्य की पुलिस उनको वह सब कुछ मुहैया करायेगी जिसके वे हकदार हैं।
53 वर्षीय रामकिशोर गौतम को 1989 में पुलिस सेवा से बर्खास्त किया गया था। तब उन्हें एक अभियुक्त को रायपुर से भोपाल ले जाने का आदेश दिया गया था। पत्नी की बीमारी की वजह से उन्होंने आदेश पालन में असमर्थता व्यक्त की थी।
इस पर शुरु हुए वाद-विवाद के दौरान कथित तौर पर हाथापाई की नौबत आ गयी थी।
इसके बाद इनको निलम्बित कर दिया गया था। तब विभागीय जांच के उपरांत इन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। इस पर विभाग के उच्चाधिकरियों के पास इनके द्वारा लगायी गयी गुहार निष्फल साबित हुई। इन्हीं परेशानियों के बीच इन पर लकवा का प्रकोप हुआ।
इनकी कमर के नीचे का अंग बिल्कुल बेकार हो गया था। इसके बावजूद रामकिशोर गौतम कहते हैं कि न्यायपालिका ने उनके मान-सम्मान की रक्षा की।
36गढ डाट इन