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Last Updated: Wed, 08 Feb 2012 18:35:37 +0530

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Mon, 28 Jun 2010 21:29:00 +0000

जिन्दगी को बचाने के लिए है नशा विरोधी अभियान



नशा एक ऐसी लत है, जिससे सिर्फ व्यक्ति नहीं विशेष वरन उससे जुड़ा परिवार, समाज यहां तक कि वातावरण भी प्रभावित होता है।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,28 जून(36गढ़ डाट इन) नशा एक ऐसी लत है, जिससे सिर्फ व्यक्ति नहीं विशेष वरन उससे जुड़ा परिवार, समाज यहां तक कि वातावरण भी प्रभावित होता है। इन दुखद स्थितियों से निपटने के लिए सरकार ने राज्य भर में नशा विरोधी अभियान छेड़ रखा है।

नशा समाज के हर वर्ग के लोग करते है। वर्तमान में शराब, गांजा, गुटखा, धूम्रपान तथा कोकीन, एल.एस.डी. जैसे मादक दवाओं तथा पदार्थों के उपयोग में अप्रत्याशित वृध्दि हुई है।

यहां तक कि किशोर एवं युवा वर्ग भी इससे अछूता नहीं है। नशे से अनेक प्राणघातक रोग होते है। यह कैंसर, टीबी., लीवर खराब होना, उच्च रक्त चाप, श्वास,तथा कार्डियोवेस्कुलर रोगों को जन्म देता है।

परिवार की आर्थिक, मानसिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। घरों में बड़ों द्वारा नशा करके आने पर इसका दुष्प्रभाव बच्चों पर भी तेजी से पड़ रहा है।

नशा करने वाले व्यक्ति को ही नहीं वरन उसके परिवार को भी समाज में हेय दृष्टि से देखा जाता है। इन दुष्प्रभावों के बावजूद नशे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

इन परिस्थितियों के बीच यह सुखद पहलू भी है कि नशे के विरोध में सरकार के साथ-साथ स्वयं सेवी संस्थाएं, धार्मिक एवं आध्यामिक संस्थाओं, तथा अब तो महिला संगठनों, स्वसहायता समूहों द्वारा भी जनजागरण का कार्य किया जा रहा है।

राज्य सरकार द्वारा समाज में नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, नैतिक एवं आर्थिक दुष्प्रभावों से अवगत कराने हेतु राज्य भर में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हे। मादक पदार्थों का सेवन करने वाले व्यक्तियों को नशे से छुटकारा दिलाने के लिए राज्य में अनेक नशामुक्ति केंद्र स्थापित किए गए है।

जहां नि:शुल्क परामर्श एवं  उपचार किया जाता है। ये केन्द्र स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से संचालित किए जा रहे है।
इन केन्द्रों में कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता घर-घर जाकर नशे के दुष्परिणामों एवं लक्षणों से परिवार को अवगत कराते है तथा नशे से पीड़ित

व्यक्ति को उपचार व परामर्श हेतु इन केन्द्रों में लाने का प्रयास करते है। इस योजना का लाभ लेने के लिए इन केन्द्रों में काफी लोग आने लगे हैं इन केन्द्रों का विस्तार राज्य के प्रत्येक जिले में करने का प्रयास किया जा रहा हैं ।

समाज कल्याण विभाग के द्वारा गठित शासकीय कला पथक दल तथा शासकीय कलाकारों के सहयोग से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर नशा मुक्ति पर अधारित नाटक, नृत्य प्रस्तुत कर नशे के विरूध्द जागरूकता लाने का कार्य किया जा रहा है, जिससे राज्य का हर क्षेत्र नशा मुक्त हो सके।

होर्डिंग, पाम्पलेट्स तथा मीडिया की सहायता से नशे के विरूध्द वातावरण बनाने का प्रयास जारी है। नशे को हतोत्साहित करने के लिए सरकार ने मादक पदार्थों के सेवन करने वाले या बेचने वाले व्यक्ति के लिए दण्ड का प्रावधान भी किया है।

जिसके तहत् मादक पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर आर्थिक दण्ड या सजा का विधान, जिसमें 6 माह से एक वर्ष तक की सजा हो सकती है।
एक बार पकड़े जाने पर उस व्यक्ति का नाम अपराधियों की फाइल में दर्ज कर लिया जाता है। मेडिकल ड्रग लाइसेंस के बिना बेहोशी की दवा या नशीली दवाओं को बेचने, खरीदने, आयात-निर्यात करने अथवा उसका उत्पादन करते हुए पकड़े जाने पर
कठोर दण्ड के तहत् न्यूनतम 10 वर्ष की कठोर सजा और एक लाख रूपये जुर्माना तथा अधिकतम 30 साल की सजा व तीन लाख रूपए जुर्माना का प्रावधान है।

राज्य को नशा मुक्त बनाने के अभियान में केन्द्रीय न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा भी आर्थिक सहायता दी जा रही है।
राज्य के इस सराहनीय प्रयास के आशा जनक परिणाम सामने आयेंगे। आशा की जानी चाहिए कि वह दिन दूर नहीं जब राज्य ही नहीं बल्कि पूरा देश नशे से मुक्त होगा तथा घर-घर में समृध्दि तथा खुशहाली होगी।

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