इस मौके पर मुख्य अतिथि की आसंदी से सुश्री लता उसेंडी ने कहा कि इन खेलों में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सभ्यता छिपी हुई है।
रायपुर, 05 फरवरी (36गढ़ डाट इन)खेल एवं युवा कल्याण मंत्री सुश्री लता उसेंडी ने आज यहां माधव राव सप्रे शाला मैदान में गिल्ली-डंडा खेलकर छत्तीसगढ़ खेल मड़ई-2010 का शुभारंभ किया।
गिल्ली-डंडा, गेंगे, पुधव पुक, पिटटूल, लुवे-लंगरची, फुगड़ी, भिर्री जैसे पारम्परिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक खेल एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय खेल मड़ई में आठ जिलों के लगभग 250 बच्चे भाग ले रहे हैं।
इस मौके पर मुख्य अतिथि की आसंदी से सुश्री लता उसेंडी ने कहा कि इन खेलों में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सभ्यता छिपी हुई है।
इसलिए प्रदेश की संस्कृति को बचाए रखने के लिए इस तरह के खेलों को बढ़ावा देने की जरूरत है। इस दिशा में प्रदेश सरकार निरंतर प्रयासरत है।
सुश्री उसेंडी ने कहा कि प्रदेश के पारम्परिक खेल मनोरंजक है और इन्हें खेलने से शरीर स्वस्थ भी रहता है।
उन्होंने इस आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक खेल एसोसिएशन को बधाई और शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संसदीय सचिव श्री विजय बघेल ने कहा छत्तीसगढ़ के लोक खेल ऐसे हैं, जिन्हें बिना साधन और बिना खर्च किए खेला जा सकता है।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक श्री जी.पी. सिंह ने कहा कि पारम्परिक खेल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इन खेलों से हर आयु वर्ग के खिलाड़ियों के साथ महिलाएं भी जुड़ी हुई है। संस्कृति को समाहित किए हुए इन खेलों की पहुंच दूरस्थ अचंलों तक है।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक खेल एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री चंद्रशेखर चकोर ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर पार्षद श्री सुभाष तिवारी, जिला लोक खेल एसोसिएशन के पदाधिकारी सर्वश्री घनश्याम वर्मा, बी.एस. दीवान, श्री चितेश साहू, श्री मिथलेश निषाद, श्रीमती संगीता बंछोर, श्री राजेश वर्मा, श्री रोहित वर्मा सहित जिलों से आए खिलाड़ी और खेल प्रेमी उपस्थित थे।
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