इस वर्ष रबी मौसम में बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत रकबा पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दो हजार हेक्टेयर बढ़ा है।
रायपुर, 05 फरवरी (36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ में इस वर्ष चालू रबी मौसम में आठ हजार 680 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों के बीजों का उत्पादन कार्यक्रम लिया जा रहा है।
इसमें से सात हजार 870 हेक्टेयर रकबे में सीधे किसानों के खेतों पर ही उन्नत किस्म के बीज प्राप्त करने के लिए बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत फसलें लगाई गई हैं, जबकि शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों, बीज विकास निगम के प्रक्षेत्रों और इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्रों में भी सात सौ हेक्टेयर से अधिक रकबे में बीज उत्पादन कार्यक्रम लिया जा रहा है।
इस वर्ष रबी मौसम में बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत रकबा पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दो हजार हेक्टेयर बढ़ा है।
पिछले वर्ष रबी मौसम में पांच हजार 790 हेक्टेयर रकबे में रबी मौसम में बीज उत्पादन कार्यक्रम लिया गया था।
किसानों को उन्नत किस्म के पूर्णत: शुध्द बीज उपलब्ध कराने के लिए पूरे राज्य में चालू रबी मौसम में सरसों, अलसी, तोरिया, मटर, गेंहू, चना सहित तिवड़ा और मूंग फसल का बीजोत्पादन किया जा रहा है।
राज्य सरकार द्वारा इस प्रकार उत्पादित बीज को किसानों के खलिहानों से ही बाजार मूल्य से अधिक दामों में खरीदकर बीजों के रूप में पुन: कृषकों को उपलब्ध कराया जाता हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि चालू रबी मौसम में बीज विकास निगम द्वारा लगभग आठ हजार 250 हेक्टेयर रकबे में रबी की विभिन्न फसलों के बीज उत्पादन किए जा रहे हैं।
कृषि विभाग द्वारा भी 328 हेक्टेयर रकबे में रबी फसलों का बीजोत्पादन लिया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्रों में 54 हेक्टेयर और निजी संस्थाओं द्वारा लगभग 50 हजार हेक्टेयर में रबी फसलों का बीज उत्पादन किया जा रहा है।
इस वर्ष चालू रबी मौसम में बीज एवं कृषि विकास निगम के 18 प्रक्षेत्रों में 432 हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन के लिए रबी की विभिन्न फसलें लगाई गई हैं।
बीज निगम के अधिकारियों की देख-रेख में सीधे किसानों के खेतों पर सात हजार 817 हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन के लिए फसलें लगाई गई हैं।
कृषि विभाग ने भी अपने अधिकारियों के मार्ग दर्शन में 52 हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन के लिए किसानों को तैयार कर फसलें लगवाई हैं।
इस संबंध में बीज प्रमाणीकरण संस्था के अधिकारियों ने भी बताया कि कोई भी कृषक या बीज उत्पादक संस्था जो बीज उत्पादन करना चाहता हो, उसे इस संस्था में अपना पंजीयन कराना पड़ता है।
किसान फसल बोने के बीस दिनों के अन्दर आवेदन पत्र तथा निर्धारित शुल्क संस्था के कार्यालय में जमा कर पंजीयन करा सकते हैं।
निर्धारित शुल्क का भुगतान प्रबंधक राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था के नाम से बैंक ड्राफ्ट बनाकर आवेदन पत्र के साथ संलग्न कर किया जाता है।
बीज उत्पादक कृषक द्वारा पंजीयन कराने के बाद बीज प्रमाणीकरण संस्था के अधिकारी फसल का निरिक्षण करते है।
प्रमाणीकरण के लिए प्रस्तावित खेत में संस्था द्वारा मान्यता प्राप्त दुकान या संस्था में ही बीज लेकर बोना चाहिए तथा इसके लिए बीज के टैग, खाली थैले, अन्य कागजात जैसे बिल, कैश मेमो, बचा हुआ बीज आदि भी संभालकर रखना चाहिए तथा मांगे जाने पर दिखना चाहिए।
कटाई, गहाई तथा ढुलाई के समय भी संस्था के अधिकारी समय-समय पर बीजों की जांच करते है इसीलिए कृषकों को खेत की कटाई , गहाई, ढुलाई आदि की तिथि निश्चित कर संस्था को कम से कम तीन दिन पहले बताना चाहिए, ताकि आवश्यक हो तो अधिकारी उक्त कार्य के समय निरीक्षण कर सकें।
अधिकारियों ने बताया कि बीजों की कटाई आदि के बाद उनकी सुखाकर उसकी ग्रेडिंग बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा बीज प्रक्रिया केन्द्र पर 5 रूपए प्रति क्विंटल शुल्क देकर की जाती है।
प्रत्येक किसान के बीज की प्रक्रिया के लिए प्रभारी द्वारा दिन निर्धारित किए जाते है तथा उसकी सूचना कृषकों को दी जाती है।
बीज की प्रक्रिया के बाद बचे या अंडर साइज बीज को वापस ले जाया जा सकता है। प्रक्रिया उपरांत बीजों को बोरो में भरकर टैंगिंग कर दी जाती है तथा यहीं बीज कृषकों को पुन: बोने के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
36गढ़ डाट इन