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Last Updated: Thu, 09 Feb 2012 05:37:09 +0530

Sat, 06 Feb 2010 19:44:00 +0000

29 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया



श्रम विभाग ने सरगुजा जिले के 29 नियोजकों के खिलाफ बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है।
36गढ़ डाट इन

रायपुर 06 फरवरी (36गढ़ डाट इन)- छत्तीसगढ़  में बाल श्रम को रोकने और विभिन्न व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले बच्चों को बाल-मजदूरी से मुक्त कराने की कार्रवाई के तहत श्रम विभाग द्वारा गठित की गई विशेष टास्क फोर्स द्वारा सरगुजा जिले में पुन: 29 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया है।

विभाग द्वारा मुक्त कराए गए सभी बच्चों के पुनर्वास के लिए भी कार्रवाई की जा रही है। श्रम विभाग ने सरगुजा जिले के 29 नियोजकों के खिलाफ बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है।

सरगुजा जिले की टास्क-फोर्स द्वारा पिछले दिनों जिले की तीन ईट निर्माण इकाईयों में की गई छापामार कार्रवाई के दौरान 29 बाल मजदूरों को मुक्त कराया गया है। उल्लेखनीय है कि इसी माह के प्रारंभ में भी सरगुजा जिले की विशेष टास्क फोर्स द्वारा पन्द्रह बाल श्रमिकों को विभिन्न प्रतिष्ठानों से मुक्त कराया गया था।

श्रम विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि सरगुजा जिले की रौशन अग्रवाल फिक्स मिट्टी ईंट निर्माण इकाई में काम करने वाले तेरह बाल श्रमिकों को टास्क-फोर्स द्वारा मुक्त कराया गया है।

पंचानन फिक्स मिट्टी ईट निर्माण इकाई चठिरमा से सात और सी.पी.शुक्ला ईंट निर्माण इकाई चठिरमा से भी नौ बच्चों को भी मुक्त कराकर इन दोनों इकाईयों के विरूद्व भी बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

सरगुजा जिले में विशेष टास्क फोर्स द्वारा विभिन्न संस्थानों में छापामार कार्रवाई के दौरान मुक्त कराए गए लगभग 80 बच्चों की  शिक्षा और उनके पुनर्वास की कार्रवाई भी की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि राज्य में बाल मजदूरी को रोकने के लिए बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम लागू किया गया हैं। अधिनियम के तहत प्रदेश के सभी जिलों में श्रम विभाग द्वारा बाल श्रम को रोकने और उस पर निगरानी रखने के लिए विशेष कार्यदल गठित किए गए हैं।

अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से ईट एवं टाईल्स निर्माण इकाईयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कारखानों तथा होटलों एवं ढाबों में काम करनाने बीस हजार रूपए प्रति बाल श्रमिक जुर्माना किए जाने का प्रावधान किया गया है।

साथ ही बच्चों से ऐसे किसी भी संस्थान में बाल श्रम कराने पर तीन माह का सश्रम कारावास दिए जाने का भी प्रावधान अधिनियम में किया गया है।


36गढ़ डाट इन








 

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