छत्तीसगढ़ के गरीब किसान और ग्रामीण अब खरगोश पालन के जरिए भी अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकेंगे।
रायपुर,18 फरवरी(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के गरीब किसान और ग्रामीण अब खरगोश पालन के जरिए भी अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकेंगे।
राज्य सरकार द्वारा उन्हें खरगोश पालन के गुर सिखाने की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।
इसके तहत कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर स्थित कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र में शासकीय खरगोश पालन एवं प्रजनन इकाई की स्थापना की गई है।
पशुधन विकास विभाग के द्वारा स्थापित इस इकाई में राजस्थान के टोंक जिले स्थित केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान केन्द्र, अविकानगर से उन्नत किस्म की चार प्रजातियों के 56 खरगोशों को लाकर उनका संवर्धन किया जा रहा है।
खरगोश पालन और प्रजनन इकाई में संवर्धित प्रजातियों के खरगोशों को पालने के लिए ग्रामीणजनों को उपलब्ध कराया जाएगा।
पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि प्रदेश के किसानों और पशुपालकों में खरगोश पालन को प्रचलित करने और उसे अतिरिक्त आमदनी के साधन के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से विस्तृत कार्ययोजना पर अमल शुरू कर दिया गया है।
बैकुण्ठपुर की खरगोश पालन एवं प्रजनन इकाई में उन्नत ब्रायलर किस्म की चार प्रजातिया सोवियत चिंचिला, ग्रे जाईन्ट, न्यूजीलेण्ड व्हाईट और ब्लेक ब्राऊन किस्म के नर एवं मादा खरगोश लाए गए हैं ।
प्रक्षेत्र में इनके बीच प्रजनन कराकर खरगोशों की संख्या बढ़ायी जाएगी और उन्हें खरगोश पालन व्यवसाय के लिए किसानों और ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही किसानों और पशुपालकों को खरगोश पालन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी देने प्रशिक्षित भी किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि खरगोश पालन से किसान कम लागत में अधिक फायदा प्राप्त कर सकते हैं। खरगोशों के मांस और इनके चमड़े तथा ऊन से बनी वस्तुएं बाजारों में ऊंचे दामों पर बिकती हैं।
खरगोश के मांस में उच्च रक्तचाप और हृदय रोगियों के लिए भी फायदेमंद औषधीय गुण होते हैं, जिससे वर्ष भर मांस के लिए इनकी मांग रहती है।
छोटे गर्भकाल, कम रोगग्रस्तता के साथ-साथ छोटे स्थान और कम लागत में व्यवसाय शुरू होने के कारण छोटे किसान भी इसे व्यावसायिक तौर पर आसानी से अपना सकते हैं।
36गढ़ डाट इन