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Last Updated: Thu, 09 Feb 2012 05:00:55 +0530

Fri, 19 Feb 2010 18:40:00 +0000

नक्सल हिंसा पीड़ितों के जीवन में नया सवेरा



छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले में नक्सल हिंसा पीड़ित ग्रामीणों को सहारा देने और उन्हें शांतिपूर्ण विकास की दिशा में आगे बढ़ाने की राज्य सरकार की कोशिशों के बेहतर नतीजे अब मिलने लगे हैं।
36गढ़ डाट इन

रायपुर, 19 फरवरी (36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले में नक्सल हिंसा पीड़ित ग्रामीणों को सहारा देने और उन्हें शांतिपूर्ण विकास की दिशा में आगे बढ़ाने की राज्य सरकार की कोशिशों के बेहतर नतीजे अब मिलने लगे हैं।

उनके जीवन में एक नया सवेरा हुआ है।  मुख्य सचिव श्री पी.जॉय उम्मेन ने आज स्वयं इस जिले के प्रवास के दौरान इसे महसूस किया।

उन्होंने जिले के विकासखण्ड गीदम स्थित ग्राम कसौली के राहत शिविर में ग्रामीणों के उन 163 परिवारों के छह सौ से अधिक सदस्यों से मुलाकात की, जिन्हें नक्सल हिंसा और आतंक के कारण अपने गांवों से विस्थापित होने के लिए मजबूर होने पर छत्तीसगढ़ सरकार ने कसौली में शिविर लगाकर एक सुरक्षित बसाहट दी। शिविर में मुख्य सचिव के आगमन से इन परिवारों में काफी उत्साह देखा गया।

उल्लेखनीय है कि ये सभी परिवार इन्द्रावती नदी के उस पार फैले अबूझमाड़ क्षेत्र के हैं। नक्सल हिंसा और आतंक के कारण गांव छोड़ने के बाद अब ये लोग राज्य सरकार की मदद से एक नई जिंदगी शुरू करते हुए पूरे आत्मविश्वास के साथ एक बार फिर अपने पांवों पर खड़े होने लगे हैं।

श्री उम्मेन ने उन्हें विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ है।

मुख्य सचिव श्री उम्मेन ने इस राहत शिविर में देखा कि ग्रामीणों द्वारा वहां स्व-सहायता समूह के रूप में संगठित होकर मशरूम उत्पादन दोना-पत्तल निर्माण, डेयरी व्यवसाय, बांस शिल्प और काष्ठ शिल्प जैसी आमदनी मूलक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

इतना ही नहीं बल्कि वहां महिलाओं द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों में दर्ज बच्चों और गर्भवती माताओं के लिए राज्य शासन की योजना के तहत पौष्टिक आहार 'रेडी-टू-इट' का भी उत्पादन किया जा रहा है।

शिविर में प्रदेश सरकार की योजना के तहत इन परिवारों को मिलाकर सोलह स्व-सहायता समूह बनाए गए हैं। इनमें से पांच समूह महिलाओं के हैं। कुछ ग्रामीण परिवार लघु वनोपज संग्रहण और सामूहिक खेती में भी लगे हुए हैं।

मुख्य सचिव ने ग्रामीणों की आर्थिक और आमदनी मूलक गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए उनके द्वारा निर्मित बांस और काष्ठ शिल्प की विभिन्न कलाकृतियों का भी अवलोकन किया और उनकी विक्रय व्यवस्था आदि के बारे में भी उनसे और स्थानीय अधिकारियों से चर्चा करते हुए पूरी जानकारी ली।
   
श्री उम्मेन ने कहा कि उन्हें इन कलाकृतियों के लिए बेहतर बाजार दिलाने में भी राज्य सरकार हर संभव मदद करेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि ग्रामीण परिवारों को उनके मनपसंद व्यवसायों का प्रशिक्षण दिलाकर उनकी कला और सृजनात्मक क्षमता को और भी अधिक विकसित किया जाएगा।

श्री उम्मेन ने शिविर में निवासरत लोगों से उनके भोजन, आवास और पेयजल की व्यवस्था सहित शिक्षा, चिकित्सा तथा रोजगार आदि के बारे में भी जानकारी ली।

मुख्य सचिव के साथ इस अवसर पर राज्य शासन के प्रमुख सचिव लोकनिर्माण श्री एन.के.राउत, सचिव आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास श्री आर.पी.मंडल और कलेक्टर दंतेवाड़ा श्रीमती रीना कंगाले सहित जिला प्रशासन के अनेक अधिकारी उपस्थित थे।

36गढ़ डाट इन








 

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