जिले के प्रसिध्द पुरातात्विक स्थल पचराही मे छत्तीसगढ़ के पुरातत्व नवीन उत्खनन व अनुसंधान विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आज शुभारंभ हुआ।
कवर्धा, 21 फरवरी(36गढ़ डाट इन) जिले के प्रसिध्द पुरातात्विक स्थल पचराही मे छत्तीसगढ़ के पुरातत्व नवीन उत्खनन व अनुसंधान विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आज शुभारंभ हुआ।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की विशेष रूचि से संस्कृति विभाग द्वारा पचराही के उत्खनन स्थल में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
संस्कृति, पर्यटन व लोक निर्माण मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने मॉ सरस्वती के तैल चित्र के समक्ष दीप प्रवलित कर पचराही में राष्ट्रीय पुरातत्व संगोष्ठि का उद्धाटन किया। इस अवसर पर बृजमोहन अग्रवाल ने पचराही के उत्खनन में मिले पुरावशेषों को संरक्षित करने विशाल संग्रहालय निर्माण की घोषणा की।
इस मौके पर बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सभ्यता व संस्कृति प्राचीन काल से दुनिया के आकर्षण का केंद्र रहा है।
राष्ट्रीय स्तर के पुरातत्व विदों के पचराही मे विचारमंथन से छग के गौरवशाली इतिहास, कला, संस्कृति की प्राचीनता और प्रमाणिक होगी। पचराही के उत्खनन मे जो जीवाश्म व पुरावशेष मिले हैं वे पुरावशेष देश के अन्य हिस्सों मे हुए उत्खनन मे नहीं मिले हैं।
पचराही के उत्खनन से फणिनागवंशी,कल्चुरी,नागवंशी शासन काल मे छग के वैभवशाली अतीत के प्रमाण सामने आये है। उन्होने कहा कि पचराही के उत्खनन से पता चला है कि प्राचीन काल मे यहां के लोगों को अंतरिक्ष विज्ञान का भी ज्ञान था।
संस्कृति मंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों से आये पुरातत्वविदों का स्वागत करते हुए कहा कि पिछले 6 सालों मे छग के सिरपुर, मल्हार, ताला के पुरातात्विक उत्खनन से जानकारी मिलती है कि देश के अन्य हिस्से के लोगों को प्राचीन काल से ही छग की समृध्द अर्थव्यवस्था, कला, संस्कृति का ज्ञान था।
छग के समृध्द इतिहास की जानकारी नई पीढ़ी को देकर उनमे यहां की सभ्यता, संस्कृति व कला के प्रति आदर व स्वाभिमान जगाना है। इस दौरान उन्होने एस.एस. यादव व अतुल प्रधान द्वारा लिखी किताब पचराही के उत्खनन का विमोचन किया।
इस दौरान उन्होने पचराही का भ्रमण कर उत्खनन मे मिले मंदिर के भग़ावशेष, राजमहल व सिक्कों का अवलोकन भी किया।संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू ने इस मौके पर कहा कि पचराही मे दो साल से जारी उत्खनन से हाफ नदी घाटी क्षेत्र मे प्राचीनकाल से ही मानव सभ्यता के विकास की जानकारी मिलती है।
उन्होने कहा कि संस्कृति विभाग ने बहुत कम समय मे देश के प्रसिध्द पुरातत्व विदों को पचराही आमंत्रित कर अनुसंधान को आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य किया है।
संस्कृति विभाग के आयुक्त राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि पचराही कि ख्याति पूरे देश मे फैल रही है। पचराही , महिशपुर व मदकूद्वीप के उत्खनन पर पूरे देश की निगाह है। उन्होने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पचराही के उत्खनन कार्य मे तेजी आयी है।
भारत सरकार के भूतपूर्व सचिव के.के. चक्रवर्ती ने कहा कि संस्कृति मंत्री के प्रयासों से शुरू हुए पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन से छग की इतिहास, संस्कृति पर नया प्रकाश पड़ा है।
उन्होने उत्खनन स्थल पर संगोष्ठी आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि महिशपुर मे भी पुरातत्व संगोष्ठि आयोजित किये जाने चाहिये। पचराही के उत्खनन मे मिले पुरावशेषों की जानकारी देश के सभी संग्रहालयों मे भेजना चाहिये।
पुरातत्वीय स्थल पर शोध संगोष्ठी के आयोजन से ग्रामीण अंचल के नागरिक भी इसका लाभ उठा रहे हैं। पचराही मे उत्खनन के परिणामों से फणिनाग राजाओं के युग की स्थापत्य कला, मूर्तिकला, नगर विन्यास, भवन सुरक्षा व्यवस्था पर पर्याप्त प्रकाश पड़ा है।
पचराही उत्खनन से पृथ्वी में जीवन के उद्भव के प्रारंभिक काल के शंख प्रजाति की जीवश्म मिली है। प्रागैतिहासिक काल के आदि मानवों के द्वारा उपयोग में लाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के पाषाण्ा उपकरण और चित्रित शैलाश्रय भी अन्वेषण किये गये है।
इस अवसर पर कलेक्टर आर.संगीता ने आभार प्रदर्शन किया। इस मौके पर नगरपालिका अध्यक्ष अनिल ठाकुर, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. प्रमोद चंद्र, डॉ बिन्दुजी महराज, पुरातत्व जीवाश्मशास्त्री डॉ.जी.एल.बादाम, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के डॉ. प्रवीण मिश्रा, के. के. झा, अमरीका की भारतीय कला विशेषज्ञ मेरी कार्मिन, मानव शास्त्री डॉ. अरूण कुमार, डॉ.ए.एल , रतन सिंह ठाकुर, जी.पी.अवस्थी, बृजलाल अग्रवाल, पुरातत्वविद, पुरातत्व मे रूचि रखने वाले स्थानीय नागरिक भी बड़ी संख्या मे उपस्थित थे।
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