Thu, 04 Mar 2010 09:09:00 +0000 छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम लागू
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित दसवीं और बारहवीं की वार्षिक परीक्षाओं में नकल करने और कराने वालों पर राज्य सरकार ने कठोर कानूनी शिकंजा कसने का निर्णय लिया है।
36गढ़ डाट इन
रायपुर, 4 मार्च(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित दसवीं और बारहवीं की वार्षिक परीक्षाओं में नकल करने और कराने वालों पर राज्य सरकार ने कठोर कानूनी शिकंजा कसने का निर्णय लिया है।
इसके लिए छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2008 लागू किया गया है।
जो भी व्यक्ति इन परीक्षाओं में अनुसूचित साधनों का प्रयोग करेगा अथवा करवाएगा, उसे तीन साल के कारावास अथवा पांच हजार रूपए के जुर्माने से दंडित किया जा सकेगा।
यह अधिनियम छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा संचालित हाई स्कूल, हायर सेकेण्डरी, हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक पाठयक्रम, डी.एड.(प्रथम एवं द्वितीय वर्ष), शारीरिक प्रशिक्षण पत्रोपाधि सहित अन्य परीक्षाओं में भी लागू होगा। मंडल के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम में अनुचित साधनों के प्रयोग का निषेध किया गया है।
कोई परीक्षार्थी किसी सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग नहीं करेगा। कोई व्यक्ति जिसे अपनेर् कत्तव्य पालन के संबंध में ऐसा करने के लिये प्राधिकार अनुज्ञा विधिपूर्वक प्राप्त नहीं है,
किसी सार्वजनिक परीक्षा में परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र के वितरण के लिए निर्धारित समय से पूर्व न तो ऐसे प्रश्नपत्र या उसके किसी भाग को या उसके किसी प्रतिलिपि को हस्तगत करेगा, न हस्तगत करने का प्रयास करेगा, न कब्जे में रखेगा।
न ऐसी कोई सूचना किसी को देगा या देने का प्रस्ताव करेगा जिसके बारे में उसे यह जानकारी या विश्वास करने का कारण है कि वह ऐसे प्रश्नपत्र से संबंधित या व्युत्पन्न या संदर्भित है।
कोई व्यक्ति जिसे सार्वजनिक परीक्षा से संबंधित कोई कार्य सौंपा जाए, ऐसी स्थिति के सिवाय जिसमें उसे अपनेर् कत्तव्यों के पालन के संबंध में ऐसा कार्य करने की अनुज्ञा दी गई हो ।
ऐसी सूचना या उनके भाग को जो उसे इस प्रकार सौंपे गये कार्य के आधार पर उसकी जानकारी में आई हो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से न तो प्रगट करेगा और न प्रगट कराएगा और न किसी अन्य व्यक्ति को उसकी जानकारी देगा। कोई व्यक्ति जिसे सार्वजनिक परीक्षा से संबंधित कोई कार्य सौंपा न गया हो या जो परीक्षार्थी न हो, सार्वजनिक परीक्षा जारी रहने के दौरान परीक्षा केंद्र में न तो प्रवेश करेगा, न ऐसे केंद्र में प्रवेश करके वहां बना रहेगा और न सार्वजनिक परीक्षा में किसी परीक्षा का अनुचित साधन के प्रयोग में किसी प्रकार की सहायता या सहयोग प्रदान करेगा।
कोई व्यक्ति जो ऐसी संस्था के जिसे सार्वजनिक परीक्षा के आयोजन में उपयोग में लाया जा रहा हो, प्रबंधतंत्र में होते हुए या कर्मचारियों में होते हुए या जिसे सार्वजनिक परीक्षा से संबंधित कोई कार्य सौंपा गया हो सार्वजनिक परीक्षा में किसी परीक्षार्थी को अनुचित साधन के प्रयोग में किसी प्रकार की सहायता या सहयोग प्रदान नहीं करेगा।
कोई व्यक्ति सार्वजनिक परीक्षा के आयोजन के, प्रयोजन के लिए परीक्षा केन्द्र से भिन्न किसी स्थान का न तो उपयोग करेगा और न उपयोग करने देगा।
जो कोई धारा 3 के उपबंधों का उल्लंघन करेगा या उल्लंघन करने का प्रयास करेगा या उल्लंघन के लिए दुष्प्रेरित करेगा, वह जुर्माने से जो पांच हजार रूपए तक हो सकता है से दंडित किया जाएगा।
जो कोई धारा 4 या धारा 5 या धारा 6 या धारा 7 या धारा के उपबंधों का उल्लंघन करेगा या उल्लंघन करने का प्रयास करेगा या उल्लंघन के लिए दुष्प्रेरित करेगा, वह कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकती है या जुर्माने से जो बीस हजार रूपए तक हो सकता है या दोनों से दंडित किया जाएगा।
जो कोई किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसे उपहति या उस पर हमला या उसका सदोष अवरोध कारित करने की या मृत्यु की या उपहति की या हमले का सदोष अवरोध का भयकारित करने की तैयारी करके धारा 9 या 10 के अधीन दण्डनीय अपराध करेगा, वह कारावास से जिसकी अवधि पांच वर्ष तक हो सकती है या जुर्माने से जो पचास हजार रूपए तक हो सकता है या दोनों से दंडित किया जाएगा।
धारा 9 के अधीन दण्डनीय अपराध संज्ञेय और जमानती होगा। धारा 10 या 11 के अधीन दण्डनीय अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होगा।
इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय समस्त अपराध का किसी प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण किया जाएगा और दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 262 की उपधारा (1), धारा 263, धारा 264 और धारा 265 के उपबंध यथा आवश्यक परिवर्तन सहित ऐसे संक्षिप्त विचारण पर लागू होंगे। राज्य सरकार या किसी व्यक्ति के विरूध्द ऐसे कार्य के लिए जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावना से किया गया हो या किए जाने के लिए आशयित हो, न तो कोई वाद या अभियोजन प्रस्तुत किया और न कोई अन्य विधिक कार्यवाही की जा सकेगी।
राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा किसी अन्य परीक्षा को उसके संबंध में वह इस अधिनियम के उपबंधों को लागू करना आवश्यक समझती है अनुसूची में सम्मिलित कर सकती है और ऐसी अधिसूचना के राजपत्र में प्रकाशन पर अनुसूची द्दुसार संशोधित समझी जाएगी। राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।
36गढ़ डाट इन
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