Thu, 04 Mar 2010 16:23:00 +0000 अब सेटेलाइट से होगी खनिज परिवहन की निगरानी
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में खनिज साधन विभाग के आधुनिकीकरण की जरूरत पर विशेष रूप से बल दिया है।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,04 मार्च(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में खनिज साधन विभाग के आधुनिकीकरण की जरूरत पर विशेष रूप से बल दिया है।
उन्होंने अधिकारियों को खदान क्षेत्रों से खनिज परिवहन करने वाले ट्रकों पर दूर संवेदी भू-उपग्रह (सेटेलाइट) आधारित ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जी.पी.एस.) के उपकरण लगवाने के निर्देश दिए हैं ताकि कोयला, बाक्साइट और लौह अयस्क जैसे बहुमूल्य खनिजों की तस्करी की आंशकाओं से निबटा जा सके।
डॉ. सिंह ने कहा कि इसके लिए कार्य योजना बनाकर खनिज परिवहनकर्ता वाहन मालिकों को भी अलग से निर्देशित किया जाए कि वे एक साल के भीतर अपने वाहनों में यह उपकरण लगवा लें।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य सरकार की खनिज जांच चौकियों में क्लोज सर्किट कैमरा लगवाने के लिए भी प्रस्ताव जल्द तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रथम चरण में 45 में से कम से कम 10 जांच चौकियों में प्रायोगिक तौर पर ऐसे उपकरण लगाए जाने चाहिए।
डॉ. रमन सिंह ने आज सवेरे यहां अपने निवास पर आयोजित छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की बैठक में कहा कि राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दस हजार से अधिक राशन की दुकानों तक सामग्री पहुंचाने वाले वाहनों पर जी.पी.एस. सिस्टम से निगरानी की बेहतर व्यवस्था की गयी है।
इससे राशन सामग्री के परिवहन और आपूर्ति में विलम्ब की शिकायतें काफी हद तक कम हो गयी हैं। ऐसी व्यवस्था खनिज परिवहन से संबंधित गाड़ियों में भी की जा सकती है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रम दक्षिण-पूर्वी कोयला प्रक्षेत्र लिमिटेड (एस.ई.सी.एल.) को भी कहा जाएगा कि वे अपने कोयला खदान क्षेत्रों में कोयला परिवहन करने वाले ठेकेदारों को उनकी ट्रकों में जी.पी.एस. उपकरण लगाने के लिए निर्देशित करें।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित खनिज विकास निधि सलाहकार समिति इस बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम (सी.एम.डी.सी.) की कोयला, लौह अयस्क और टिन अयस्क परियोजनाओं के लिए 58 करोड़ 52 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदान की गयी।
इसके अन्तर्गत रायगढ़ जिले के गारे-पालमा कोल ब्लॉक में खनिज अन्वेषण के लिए लगभग 52 करोड़ 65 लाख रूपए, उत्तर बस्तर (कांकेर) जिले के आरी-डोंगरी में लौह अयस्क परियोजना के पूर्वेक्षण और अन्वेषण कार्य के लिए 55 लाख 61 हजार रूपए ।
कबीरधाम (कवर्धा) जिले में लौह अयस्क परियोजना के पूर्वेक्षण और अन्वेषण के लिए तीन करोड़ 29 लाख रूपए, दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले में टिन अयस्क परियोजना में खनिज अन्वेषण के लिए 80 लाख 32 हजार रूपए और बैलाडीला के डिपॉजिट नम्बर 13 के विकास के लिए राष्ट्रीय खनिज विकास निगम-छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम (एन.एम.डी.सी.-सी.एम.डी.सी.) के संयुक्त उपक्रम की अंशपूंजी के लिए एक करोड़ 22 लाख 50 हजार रूपए की स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि राज्य में प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान एकत्रित खनिज राजस्व के पांच प्रतिशत की समतुल्य राशि छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि के लिए निर्धारित की जाती है।
देश में खनिज भंडारों के अन्वेषण और आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए खनिज विकास निधि का गठन वर्तमान में केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की आज की बैठक में प्रमुख सचिव आवास एवं पर्यावरण श्री एन. बैजेन्द्र कुमार, सचिव खनिज साधन विभाग श्री आर.एस.विश्वकर्मा और संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म श्री एस.के.त्रिवेदी सहित खनिज साधन विभाग, भौमिकी एवं खनिकर्म संचालनालय और राज्य खनिज विकास निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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