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Last Updated: Tue, 22 May 2012 04:08:46 -0500

Thu, 04 Mar 2010 23:52:00 +0000

ग्रामीण महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल आने प्रोत्साहित करें



छत्तीसगढ़ में मातृ और शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने ग्रामीण महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल आने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों को दिए गए हैं।
36गढ़ डाट इन
रायपुर 4 मार्च (36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ में मातृ और शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने ग्रामीण महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल आने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों को दिए गए हैं।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव श्री विकासशील ने आज यहां स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि जननी सुरक्षा योजना ही एक ऐसी योजना है, जिसके माध्यम से मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि अगले वर्ष कम से कम 70 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जननी सुरक्षा योजना के तहत माताओं को दी जाने वाली राशि में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए।

यदि कहीं कोई गड़बड़ी की जाती है तो उनके खिलाफ सीधे निलंबन की कार्रवाई की जाए। कार्रवाई करने के लिए संबंधित मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

स्वास्थ्य सचिव श्री विकासशील ने बैठक में कहा कि जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि का भुगतान चेक के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर किया जाए। उन्होंने कहा कि हितग्राही को प्रोत्साहन राशि के भुगतान के लिए संबंधित ए.एन.एम. को हितग्राही का फार्म भरना होता है।

यदि ए.एन.एम. फार्म नहीं भरतीं तो, उनके खिलाफ निलंबन की कार्यवाही की जाए। बैठक में बताया गया कि अप्रैल 2009 से जनवरी 2010 तक दो लाख चार हजार 435 महिलाओं ने अस्पताल में प्रसव कराया है।

इनमें से एक लाख 19 हजार 86 महिलाओं को पन्द्रह करोड़ 75 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है।

शेष लंबित प्रकरणों का भुगतान शीघ्र करने के निर्देश दिए गए हैं। श्री विकासशील ने कहा कि मातृ-मृत्यु दर की सूचना देने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर पोस्ट कार्ड का वितरण किया जा रहा है। पोस्ट कार्ड संबंधित मितानिनों को वितरित कराएं।

मितानिन पोस्ट कार्ड के माध्यम से मातृ मृत्यु की सूचना कारण सहित संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्य संचालनालय को देंगे। इससे मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि प्रसव पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य रूप से होना चाहिए। विकासखंड चिकित्सा अधिकारी इसकी नियमित मानीटरिंग करें। प्रसव के पूर्व गर्भवती माता का कम से कम तीन बार अनिवार्य रूप से जांच हो।

जांच में हीमोग्लोबिन, रक्तचाप, यूरिन टेस्ट और वजन का परीक्षण होना चाहिए और जांच में यदि कोई गंभीर प्रकरण सामने आता है तो यह सुनिश्चित करें कि उसकी डिलेवरी अनिवार्य रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में हो।

प्रसव पूर्व गर्भवती माताओं की तीन बार जांच को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित खंड चिकित्सा अधिकारी की होगी। स्वास्थ्य सचिव ने जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि सत्यापन में जो उपकरण कडंम पाए जाते हैं, उन उपकरणों के नियमानुसार अपलेखन की कार्रवाई की जाए। बैठक में राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम, शिशु स्वास्थ्य और टीकाकरण कार्यक्रम और परिवार नियोजन कार्यक्रम की समीक्षा की गई।

बैठक में विशेष सचिव स्वास्थ्य श्री अजय पाण्डेय, संचालक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण श्री पी.अन्बलगन, राज्य स्वास्थ्य संसाधन केन्द्र के संचालक डॉ. एन.के. एन्टोनी सहित प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिविल सर्जन और जिला कार्यक्रम अधिकारी उपस्थित थे।

36गढ़ डाट इन







 

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