Sun, 07 Mar 2010 00:29:00 +0000 महिलाओं की बेहतरी के लिए सरकार वचनबध्द: मुख्यमंत्री
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में राजधानी रायपुर में कल सात मार्च को शुरू हो रहे दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय महिला महोत्सव की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी है।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,6 मार्च(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में राजधानी रायपुर में कल सात मार्च को शुरू हो रहे दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय महिला महोत्सव की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी है।
डॉ. सिंह ने आज यहां जारी शुभकामना संदेश में आगामी आठ मार्च को मनाए जाने वाले अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस का उल्लेख करते हुए सभी महिलाओं को हार्दिक बधाई प्रेषित की है।
डॉ. सिंह ने कहा है कि यह दिवस पूरी दुनिया की महिलाओं के लिए आत्म विश्वास और आत्म सम्मान का प्रतीक बन गया है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए हो रहे विभिन्न प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा है कि राज्य सरकार महिलाओं की बेहतरी के लिए वचनबध्द है।
डॉ. सिंह ने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष 2010-11 के बजट में महिला और बाल विकास विभाग के लिए 826 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है, जो चालू वर्ष 2009-10 के बजट के मुकाबले 31 प्रतिशत अधिक होगा।
डॉ. सिंह ने कहा कि प्रदेश की महिलाओं और बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए आंगनबाड़ी सेवाओं को और भी अधिक बेहतर बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां शत-प्रतिशत आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए पौष्टिक आहार-'रेडी टू-ईट फुड' तैयार करने का कार्य महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से हो रहा है।
इसके लिए भी बजट में पर्याप्त प्रावधान किया गया है। टोनही के नाम पर यदा-कदा होने वाली महिला उत्पीड़न की घटनाओं की रोकथाम के लिए राज्य सरकार द्वारा टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 बनाकर महिलाओं को कानूनी सुरक्षा दी गयी है।
प्रदेश की 34 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नि:शुल्क सायकल देने की योजना भी राज्य सरकार द्वारा शुरू की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि राज्य में अगले माह 01 अप्रैल से शुरू हो रहे नये वित्तीय वर्ष 2010-11 में 666 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण के लिए महिला और बाल विकास विभाग के बजट में 20 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।
किशोरी बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए 'सबला योजना' भी नये वित्तीय वर्ष में शुरू की जा रही है।
इसके अन्तर्गत 11 वर्ष से 18 वर्ष तक आयु समूह की शाला त्यागी बालिकाओं को पूरक पोषण आहार देने के साथ-साथ उन्हें स्वास्थ्य और पोषण, जीवन कौशल, बच्चों की देखभाल और गृह प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके लिए राज्य की प्रत्येक एकीकृत बाल विकास परियोजना में 'किशोरी स्त्रोत केन्द्र' बनाए जाएंगे।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राज्य की त्रि-स्तरीय पंचायतराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किए जाने पर इन संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी में उत्साहजनक वृध्दि देखी गयी है।
डॉ. रमन सिंह ने अपने संदेश में बताया कि हाईस्कूल स्तर पर अब तक एक लाख 50 हजार से अधिक बालिकाओं को सरस्वती सायकल प्रदाय योजना के तहत नि:शुल्क सायकल दी जा चुकी है।
इस योजना में अनुसूचित जातियों और जनजातियों की समस्त बालिकाओं सहित पिछड़ा वर्ग और अन्य वर्गों की गरीबी रेखा श्रेणी की बालिकाओं को नि:शुल्क सायकल दी जा रही है, ताकि वे अपने घर से स्कूल आसानी से आना-जाना कर सकें। महिला स्व-सहायता समूहों को छत्तीसगढ़ महिला कोश के जरिए विभिन्न व्यवसायों के लिए सिर्फ साढ़े छह प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया जा रहा है।
इसके अलावा प्रदेश की महिलाओं को पारिवारिक और सामाजिक दृष्टि से अधिकार सम्पन्न बनाने के लिए उन्हें भूमि खरीदी पर पंजीयन शुक्ल में दो प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है।
डॉ. रमन ंसिंह ने कहा कि प्रदेश के गरीब परिवारों की विवाह योग्य बेटियों की शादी के लिए कन्यादान योजना के तहत महिला और बाल विकास विभाग द्वारा जन-सहयोग से आयोजित सामूहिक विवाह समारोहों में अब तक 20 हजार बेटियों के हाथ पीले हो चुके हैं।
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