Tue, 16 Mar 2010 23:52:00 +0000 कैदियों को स्वावलंबी बनाने में जेल उद्योग सहायक
छत्तीसगढ़ की केन्द्रीय जेलों में संचालित विभिन्न उद्योग धंधे कैदियों की जेल से रिहाई के पश्चात उनके पुनर्वास हेतु स्वावलंबी बनाने और उनके परिवार के भरण पोषण में सहायक सिध्द हुए हैं।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,16 मार्च(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ की केन्द्रीय जेलों में संचालित विभिन्न उद्योग धंधे कैदियों की जेल से रिहाई के पश्चात उनके पुनर्वास हेतु स्वावलंबी बनाने और उनके परिवार के भरण पोषण में सहायक सिध्द हुए हैं।
केन्द्रीय जेलों में बुनाई, सिलाई, बढ़ई कार्य, प्रिंटिंग प्रेस, लोहारी उद्योग, मसाला उद्योग, साबुन एवं वाशिंग पावडर उद्योग, वुडकार्विंग, कम्बल, टेराकोटा, पावरलूम, बेलमेटल, कोसा और जूट उद्योग आदि संचालित है।
जेल विभाग के विभागीय प्रशासकीय प्रतिवेदन वर्ष 2009-10 में दी गई जानकारी के अनुसार उद्योगों को संचालित करने का मुख्य उद्देश्य बंदियों को व्यस्त रखना और उन्हें सजा समाप्ति पश्चात आजीविका उपार्जन में सुविधा दिलाना है, ताकि जेल से रिहाई के पश्चात वे अपने पुनर्वास हेतु स्वावलंबी रहे और अपने परिवार का भरण पोषण कर सके।
केन्द्रीय जेल रायपुर स्थित महिला प्रकोष्ठ में महिला बंदियों द्वारा कढ़ाई, बुनाई, सिलाई, पापड़ बनाने आदि कार्य किए जाते हैं। अशासकीय महिला समाज सेवी संगठनों के द्वारा जेल में परिरूध्द महिला बंदियों को काथा कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया गया।
इस कला में महिला बंदी धागे से कोसा कपड़े में विभिन्न प्रकार की चित्रकारी करती हैं। दिसम्बर 2009 तक जेल उद्योग में उत्पादित सामग्रियों की बिक्री की गई, जिसकी कीमत 84 लाख 71 हजार 737 रूपए थी।
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