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Last Updated: Thu, 09 Feb 2012 03:40:31 +0530

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Fri, 19 Mar 2010 22:35:00 +0000

छत्तीसगढ़ में एम्बुलेंस सेवाओं का व्यापक नेटवर्क



छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों को त्वरित चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए पूरे प्रदेश के एम्बुलेंसों का व्यापक नेटवर्क स्थापित किया जाएगा।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,19 मार्च(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों को त्वरित चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए पूरे प्रदेश के एम्बुलेंसों का व्यापक नेटवर्क स्थापित किया जाएगा।

इसके तहत प्रदेश के किसी भी कोने से 108 नम्बर डायल करने पर आधे घंटे के भीतर चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ के साथ एम्बुलेंस हाजिर हो जाएगा।

छत्तीसगढ़ मेडिकल कोर योजना के तहत इसे आगामी छह महीनों के भीतर पूरे प्रदेश में शुरू कर दिया जाएगा।

यह घोषण्ाा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने आज विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए की।

उन्होंने सदन को बताया कि इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2010-11 के बजट में एक सौ करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। श्री अग्रवाल ने कहा कि अब प्रदेश के मूक बधिर बच्चे बोल और सुन सकेंगे।

राज्य सरकार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के मूक-बधिर बच्चों के आपरेशन के लिए छह लाख रूपए और सामान्य परिवारों के बच्चों के आपरेशन के लिए चार लाख रूपए की सहायता देगी।

स्वास्थ्य, वाणिज्यिक कर और राजस्व मंत्री श्री अमर अग्रवाल द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत अपने विभाग से संबंधित 1499 करोड़ 78 लाख 42 हजार रूपए के अनुदान मांगों को आज ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

इसमें लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के लिए 480 करोड़ 10 लाख 40 हजार रूपए, चिकित्सा शिक्षा के लिए 220 करोड़ 84 लाख 60 हजार रूपए, वाणिज्यिक कर विभाग के लिए 131 करोड़ 11 लाख 42 हजार रूपए, राजस्व के लिए 10 करोड़ 84 लाख 35 हजार रूपए, भूराजस्व  प्रशासन के लिए 345 करोड़ 38 लाख 60 हजार रूपए, पुनर्वास के लिए एक करोड़ 49 लाख रूपए और प्राकृतिक आपदा एवं सूखा राहत कार्य के 310 करोड़ रूपए शामिल है।

श्री अग्रवाल ने सदन में घोषणा की कि रायगढ़ में प्रस्तावित प्रदेश का चौथा मेडिकल कॉलेज अगले वर्ष प्रारंभ कर दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश में तीन-चार और मेडिकल कॉलेज शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने संजीवनी कोष के तहत गंभीर बीमारियों के मरीजों को इलाज के लिए वर्तमान में दी जा रही सहायता डेढ़ लाख रूपए से बढ़ाकर ढाई लाख रूपए करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत अभी जिन गंभीर बीमारियों को शामिल नहीं किया गया है, उन्हें भी सूची में जोड़ा जाएगा।

श्री अग्रवाल ने कहा कि दवाओं और उपकरणों में गुणवत्ता लाने के लिए 'छत्तीसगढ़ मेडिकल कार्पोरेशन' का गठन जल्द किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे दवाओं और आवश्यकतानुसार गुणवत्तायुक्त चिकित्सा उपकरणों की खरीदी संभव हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान क्रय नियमों के अनुसार न्यूनतम दर प्रस्तुत करने वाले से उपकरण्ा खरीदना मजबूरी होती है, लेकिन अब चिकित्सा उपकरणों की खरीदी के लिए नियमों में बदलाव किया गया है। इसमें न्यूनतम दर की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है, अब केवल ब्रांडेड चिकित्सा उपकरण ही खरीदे जाएंगे।

प्रदेश में उपलब्ध स्वास्थ्य संसाधनों का जिक्र करते हुए श्री अग्रवाल ने कहा कि पिछले छह वर्षों से अस्पताल भवनों और चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में 1365 उप स्वास्थ्य केन्द्र, 57 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और दस सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भवनविहीन है।

इस कमी को दूर करने के लिए वर्ष 2010-11 के बजट में उप स्वास्थ्य केन्द्र के तीन सौ, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के 57 और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के पांच भवन निर्माण्ा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सदन में घोषणा की कि आगामी तीन वर्षों में प्रदेश का कोई भी अस्पताल भवनविहीन नहीं रहेगा।

उन्होंने स्वीकार किया कि प्रदेश में चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ की कमी है। इसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। चिकित्सकों की भर्ती की जा रही है। इसके साथ ही नर्स, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मौजूदा प्रशिक्षण संस्थाओं की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है।

पहले 168 नर्सों और तीन सौ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दे पाते थे। अब निजी संस्थाओं के सहयोग से दो हजार नर्सों और एक-एक हजार महिला और पुरूष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान करने में सक्षम हो गए हैं। दो-तीन वर्षों के भीतर ऐसा कोई उप स्वास्थ्य केन्द्र नहीं होगा, जहां कोई स्टॉफ ना हो।

इसके साथ ही राज्य सरकार यह भी प्रयास कर रही है कि लोग बीमार ही ना हों। इसके लिए छत्तीसगढ़ में 121 ग्रामों को आयुर्वेद ग्राम के रूप में चयन किया गया है, जहां देशी जड़ी-बूटियों से इलाज के साथ ही उन्हें प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
     
राजस्व विभाग के संबंध में श्री अग्रवाल ने कहा कि नायब तहसीलदारों के रिक्त पदों को भरने के लिए कार्यवाही की जा रही है। किसानों की सुविधा के लिए उन्हें कम्प्यूटरीकृत खसरा और बी-वन दिया जा रहा है।

भू-अभिलेखों में गड़बड़ी और जमीनों की अदला-बदली के संबंध में सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए श्री अग्रवाल ने कहा कि अब अक्षांश और देशांश के आधार पर भूमि का सीमांकन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में शीघ्र ही ग्लोबल पोजिसनिंग सिस्टम को लागू किया जाएगा, जिससे भू-अभिलेखों में त्रुटि नहीं हो पाएगी।

उन्होंने कहा कि कृषि भूमि के औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग के लिए अधिगृहित किए जाने पर मुआवजे की राशि दस से बारह सौ गुना की वृध्दि की गई है। भूमि के मुआवजे में इतनी वृध्दि देश के किसी अन्य राज्य में नहीं की गई है।

सदन में लगभग साढ़े तीन घंटे चली चर्चा में डॉ. हरिदास भारध्दाज, श्री देवजी भाई पटेल, श्री धर्मजीत सिंह, श्री फूलचंद सिंह, श्री नंदकुमार साहू, श्रीमती सुमित्रा मार्कोले, श्री सौरभ सिंह, श्रीमती लक्ष्मी बघेल और श्री दयालदास बघेल ने भाग लिया।

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