Tue, 23 Mar 2010 23:58:00 +0000 छत्तीसगढ़ी राजभाषा पर सफलतापूर्वक सम्मेलन आयोजित
छत्तीसगढ़ शासन की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के द्वारा आदिवासी बहुल बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में 23 मार्च 2010 को साहित्यकार सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
36गढ़ डाट इन
जगदलपुर,23 मार्च(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ शासन की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के द्वारा आदिवासी बहुल बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में 23 मार्च 2010 को साहित्यकार सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
इस आयोजन में अंचल के अनेक साहित्यकारों को सम्मानित भी किया गया। दिनभर चले इस सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ी भाषा को लेकर साहित्यकारों ने गहन विचार विमर्श भी किया।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के द्वारा 23 मार्च 2010 को जगदलपुर स्थित स्थानीय होटल के ''कांफ्रेस हॉल'' में यह सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन के उद्धाटन सत्र के मुख्य अतिथि नगरपालिक निगम जगदलपुर के महापौर श्री किरण देव थे।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सचिव डॉ.सुरेन्द्र दुबे और सदस्य डॉ.रमेन्द्र नाथ मिश्र और पूर्व मंत्री श्री अरविंद नेताम की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री किरण देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है।
इस क्षेत्र में साहित्यकारों और सभी लोगों को और भी अधिक काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग प्रदेश में अपने दायित्वों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर रही है।
इसी कड़ी में बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाना सराहनीय है। महापौर ने कहा कि बस्तर अंचल में हर 10-15 से 20 किलोमीटर की दायरे में बोलियां बदल जाती हैं।
इस अंचल में हल्बी, गोंडी, भतरी, दोरला आदि बोलियां बोली जाती हैं। किन्तु जिले के केशकाल इलाके में छत्तीसगढ़ी का प्रभाव देखने को मिलता है।
उन्होंने साहित्यकारों से कहा कि चूंकि छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है। इसलिए इस क्षेत्र में इन बोलियों का प्रभाव के होते हुए इसके साथ काम करने की जरूरत है।
कार्यक्रम में उपस्थित छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सदस्य डॉ.रमेन्द नाथ मिश्र ने कहा कि सन् 1703 में दंतेवाड़ा में छत्तीसगढ़ को लेकर मां दंतेश्वरी के समक्ष इसकी ज्योति जलायी गयी थी। इसके बाद 1890, 1921 में भी प्रदेश में अनेक काम हुए।
वर्ष 1937 में एक अंग्रेज में छत्तीसगढ़ भाषा का शब्दकोष बनाया था। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ी बहुत ही सरल और सहज भाषा है।
कार्यक्रम में उपस्थित छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सचिव पद्मश्री डॉ.सुरेन्द्र दुबे ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा न केवल सरल और सहज भाषा है, अपितु यह राज्य की जनभाषा भी है।
डॉ.सुरेन्द्र दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखने वाले लेखकों और साहित्यकारों से हर प्रकार की कृतियां और रचनाएं आमंत्रित कर रही है।
जिसके लिए उन्हें आयोग के द्वारा यथोचित राशि भी दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने बस्तर अंचल के साहित्यकारों से भी कहा कि वे अपनी कृतियां और प्रकाशन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग को भेज सकते हैं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित श्री अरविंद नेताम ने छत्तीसगढ़ी भाषा पर अपने विचार रखते हुए सम्बोधित दिया। छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के द्वारा आयोजित इस साहित्यकार सम्मेलन में उद्धाटन सत्र में अंचल के तमाम साहित्यकारों सहित राजधानी रायपुर से पधारे साहित्यकारों को शॉल, श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के द्वारा आयोजित इस साहित्यकार सम्मेलन और सम्मान समारोह के उद्धाटन सत्र में सम्पूर्ण कार्यक्रम के संयोजक डॉ.के.के.झा ने आभार प्रदर्शन किया।
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