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Last Updated: Thu, 09 Feb 2012 03:42:34 +0530

Wed, 24 Mar 2010 00:06:00 +0000

राष्ट्रीय खनिज नीति में प्रस्तावित संशोधन का विरोध



मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 1957 के खनिज कानून में किए जाने वाले उस संशोधन का विरोध किया है ।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,23 मार्च(36गढ़ डाट इन) मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 1957 के खनिज कानून में किए जाने वाले उस संशोधन का विरोध किया है ।

जिसमें खदानों के आवंटन के लिए 'पहले आओ-पहले पाओ' के सिध्दांत के अनुसार प्रथम आवेदन को स्वीकार करने का प्रावधान किया जाने वाला है।

इस प्रावधान के लागू होने पर खनिज पट्टा, पूर्वेक्षण और लाइसेंस आदि सभी के लिए प्रथम आवेदन को ही मंजूरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने आज यहां राज्य विधानसभा में कहा कि उन्होंने केन्द्र सरकार के समक्ष राष्ट्रीय खनिज नीति में होने वाले इस संशोधन पर ऐतराज जताया है।

डॉ. सिंह ने अपने विभाग की अनुदान मांगों पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने यह संकल्प लिया है कि हम अपने राज्य के खनिजों के व्यापार के लिए किसी को भी खदान आवंटित नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के लौह अयस्क और छत्तीसगढ़ के खनिजों का इस्तेमाल वेल्यू एडीशन के लिए राज्य के भीतर किए जाने की पक्षधर है, ताकि यहां उन पर आधारित उद्योग लगें और उसका समुचित लाभ प्रदेश वासियों को भी मिले।  
   
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि राज्य के खनिज राजस्व में विगत छह वर्षों में उल्लेखनीय और उत्साहजनक वृध्दि दर्ज की गयी है।

वित्तीय वर्ष 2003-04 में राज्य को 637 करोड़ रूपए का खनिज राजस्व प्राप्त हुआ था, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2008-09 में दोगुना होकर एक हजार 237 करोड़ 30 लाख रूपए तक पहुंच गया, जबकि चालू वित्तीय वर्ष 2009-10 में प्रदेश को विभिन्न खनिजों से एक हजार 600 करोड़ रूपए की रायल्टी मिलने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री ने आज यहां विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित आगामी एक अप्रैल से शुरू होने वाले नये वित्तीय वर्ष 2010-11 के लिए बजट अनुदान मांगों पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए सदस्यों को यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि राज्य के कोयला खनिज बहुल रायगढ़ और सरगुजा जैसे जिलों में अगले पचास वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर आम जनता के लिए सड़क और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं के विकास की एक दीर्घकालीन कार्य-योजना बनाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि इसमें केन्द्रीय उपक्रम दक्षिण-पूर्वी कोयला प्रक्षेत्र लिमिटेड (एस.ई.सी.एल.) और अन्य निवेशकों के साथ मिलकर सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पी.पी.पी.) मॉडल के अनुरूप कार्य किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भारतीय इस्पात प्राधिकरण के साथ मिलकर लौह अयस्क बहुल दल्लीराजहरा से रावघाट और जगदलपुर तक रेल लाईन बिछाने की परियोजना पर काम शुरू किया है।

36गढ़ डाट इन








 

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