Thu, 25 Mar 2010 23:45:00 +0000 चौकी-बेलन के कुटीर उद्योग से दूर हुई बेरोजगारी
छत्तीसगढ़ राजधानी रायपुर के एक बेरोजगार गरीब युवक ने सिर्फ चालीस हजार रूपए का बैंक ऋण लेकर हर महीने दो लाख रूपए तक के कारोबार का एक नया कीर्तिमान बनाया है।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,25 मार्च(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ राजधानी रायपुर के एक बेरोजगार गरीब युवक ने सिर्फ चालीस हजार रूपए का बैंक ऋण लेकर हर महीने दो लाख रूपए तक के कारोबार का एक नया कीर्तिमान बनाया है।
बेरोजगारी की समस्या तो अब संजय जंघेल के लिए बीते दिनों की कहानी बन चुकी है, जबकि आज वे अपने हाथों के हुनर और व्यावसायिक कौशल के जरिए कामयाबी की कहानी रचते हुए छत्तीसगढ़ से बाहर भी अपना व्यापार फैला चुके हैं।
उनकी अपनी बेरोजगारी तो दूर हो चुकी है, वे अपने साथ चार अन्य बेरोजगारों को भी रोजगार दे रहे हैं। संजय जघेल और उनके साथियों द्वारा रसोई घरों के लिए निर्मित चौकी और बेलन राजधानी रायपुर से लेकर दूर-दराज के गांवों और शहरों तक पहुंचने लगे हैं।
उनके चौकी-बेलन से बनने वाली रोटियों का स्वाद हजारों परिवार ले रहे हैं। स्थानीय लोधीपारा स्थित अवन्ति बाई चौक में चौकी-बेलन का व्यवसाय कर रहे संजय जंघेल को बेरोजगारी के दिनों में स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना की जानकारी मिली ।
उन्होंने इस योजना का संचालन करने वाले प्रदेश सरकार के जिला शहरी विकास अभिकरण में आवेदन प्रस्तुत किया, जहां उनका ऋण प्रकरण तैयार कर उन्हें पंजाब नेशनल बैंक से चालीस हजार रूपए का ऋण दिलाया गया।
चौकी-बेलन का निर्माण श्री जंघेल के परिवार का पुश्तैनी व्यवसाय होने के कारण उन्हें अपने इस कार्य को और भी आगे बढ़ाने में कोई दिक्कत नहीं हुई। आज वे अपने चार दोस्तों को भी अपने इस व्यवसाय से जोड़कर रोजगार दे चुके हैं। इस प्रकार श्री जंघेल के परिवार के साथ-साथ उनके मित्रों के चार परिवारों के लिए भी यह व्यवसाय एक बड़ा सहारा साबित हो रहा है।
श्री जंघेल के कुटीर उद्योग में निर्मित चौकी और बेलन की लोकप्रियता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के अलावा महाराष्ट्र, उड़ीसा और बंगाल आदि राज्यों के व्यापारी भी रायपुर आकर उनके छोटे-से कारखाने से माल खरीद कर ले जाते हैं और वहां के बाजारों में बेचकर स्वयं भी बेहतर आमदनी प्राप्त करते हैं।
श्री जंघेल ने बताया कि अब उनके इस कुटीर उद्योग में हर महीने दो लाख रूपए तक की बिक्री हो रही है और अब तक वे तीस लाख रूपए से भी ज्यादा कीमत की चौकी और बेलन बेच चुके हैं।
स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना का लाभ उठाकर सफलता की राह पर बढ़ते हुए इस युवक ने अन्य शहरी बेरोजगारों को भी आत्म निर्भरता के मार्ग पर बढ़ने की प्रेरणा दी है।
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