Sat, 27 Mar 2010 17:57:00 +0000 15 लाख किसानों की फसलों का बीमा
छत्तीसगढ़ के 15 लाख 25 हजार किसानों की पिछले दो वर्षो में रबी और खरीफ की फसलों का 173 करोड़ 46 लाख रूपए से अधिक राशि का बीमा कराया गया है।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,27 मार्च(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के 15 लाख 25 हजार किसानों की पिछले दो वर्षो में रबी और खरीफ की फसलों का 173 करोड़ 46 लाख रूपए से अधिक राशि का बीमा कराया गया है।
राज्य शासन द्वारा इतनी बड़ी संख्या में किसानों की फसलों का यह बीमा राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत कराया गया है। योजना के तहत पिछले दो सालों में 44 करोड़ 22 लाख रूपए से अधिक की प्रीमियम राशि फसलों का बीमा कराने के लिए जमा की गई है।
योजना के तहत वर्ष 2008-09 में खरीफ मौसम की बीमित फसलों के लिए सात लाख 95 हजार किसानों को और रबी मौसम की फसलों के लिए 36 हजार 709 किसानों को लगभग 68 करोड़ रूपए की क्षतिपूर्ति का भुगतान भी दिलाया गया।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि प्राकृतिक आपदाओं, रोगों, कृमियों के कारण फसलों के नष्ट होने की दशा में बीमित किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए राज्य भर में राष्ट्रीय कृषि फसल बीमा योजना लागू की गई है।
राज्य शासन द्वारा कृषि विभाग के माध्यम से किसानों की फसलों का बीमा अनिवार्यत: करवाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
फसल बीमा योजना के तहत राज्य शासन द्वारा विगत वर्ष कृषि विभाग के माध्यम से वर्ष 2008 के खरीफ मौसम में 07 लाख 91 हजार 664 किसानों ने अपनी 14 लाख 86 हजार हेक्टेयर रकबे में लगी फसलों का बीमा कराया था।
इनमें से कृषि विभाग द्वारा दो लाख 36 हजार 537 किसानों को क्षतिपूर्ति राशि से लाभान्वित किया गया। इन किसानों को 68 करोड़ 05 लाख रूपए क्षतिपूर्ति की राशि वितरित की गई है।
वर्ष 2008-09 के रबी मौसम में 36 हजार 709 किसानों ने 84 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लगी रबी फसलों का बीमा कराया है।
खरीफ 2009 में राज्य के छह लाख 97 हजार 023 किसानों ने प्राकृतिक आपदाओं से फसलों में होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए अपनी फसलों का 77 करोड़ 73 लाख रूपए से अधिक का बीमा कराया है।
अधिकारियों ने राष्ट्रीय फसल बीमा योजना के विषय में बताया कि इस योजना के अंतर्गत खरीफ मौसम में धान सिंचित, धान असिंचित, मक्का, मूंगफली, सोयाबीन और अरहर को शामिल किया गया है।
रबी मौसम में गेहूं सिंचित, गेहूं असिंचित, चना, राई-सरसों, अलसी और आलू को राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत शामिल किया गया है।
बीमा योजना में किसानों को क्षतिपूर्ति दावे का भुगतान प्राकृतिक आपदाओं जैसे सूखा या अल्पवर्षा, ओला, बाढ़, बिजली गिरने से आग लगने, फसल में रोग एवं कीट प्रकोप, तुफान-चक्रवात, भू-स्खलन, जल प्लावन आदि होने पर किया जाता है।
उन्होनें बताया कि इस योजना का लाभ अऋणी कृषकों के लिए ऐच्छिक और ऋणी कृषकों के लिए अनिवार्य है।
इस योजना में सरकार द्वारा लघु एवं सीमांत कृषकों को बीमा के प्रीमियम में दस प्रतिशत का अनुदान भी दिया जा रहा है। ऐसे कृषक जिन्होंने इस वर्ष किसी भी बैंक से खेती के लिए किसी प्रकार का कर्जा नहीं लिया है, वे भी इस बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं।
ऐसे कृषक जो बटाईदार हो या जो पहले से बकाया कर्जदार हो वे भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। कृषि बीमा कराने के लिए कृषक अपने क्षेत्र के केन्द्रीय सरकारी बैंक या सभी राष्ट्रीकृत बैंकों में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं।
इस योजना के लिए कृषक द्वारा धारित रकबे के खसरे, बी-1 व नक्शे की प्रतिलिपि, फसल बोआई का प्रमाण पत्र, अऋणी कृषकों के लिए अऋणी प्रस्ताव तथा संबंधित बैंक में बचत खाता होना अनिवार्य है।
राष्ट्रीय फसल बीमा योजना से संबंधित जानकारी के लिए किसान किसी भी निकटतम सरकारी बैंक, सभी राष्ट्रीकृत बैंकों के साथ-साथ सहायक परियोजना अधिकारी और क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से भी सम्पर्क कर सकते हैं।
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