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Last Updated: Thu, 09 Feb 2012 04:14:25 +0530

Tue, 30 Mar 2010 09:25:00 +0000

शिक्षा का अधिकार कानून 1 अप्रैल से



छह से चौदह वर्ष आयु के सभी बच्चों को आठवीं तक अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा देने के लिए केन्द्र शासन द्वारा बनाए गए शिक्षा का अधिकार कानून छत्तीसगढ़ में भी एक अप्रैल 2010 से प्रभावशील हो जाएगा।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,30 मार्च(36गढ़ डाट इन) छह से चौदह वर्ष आयु के सभी बच्चों को आठवीं तक अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा देने के लिए केन्द्र शासन द्वारा बनाए गए शिक्षा का अधिकार कानून छत्तीसगढ़ में भी एक अप्रैल 2010 से प्रभावशील हो जाएगा।

इस कानून को लागू करने के लिए राजीव गांधी शिक्षा मिशन द्वारा व्यापक तैयारी शुरू कर दी गई है।

राजीव गांधी शिक्षा मिशन के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इस कानून के तहत 06 से 14 वर्ष उम्र के शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

शिक्षा का अधिकार कानून के तहत राज्यों के लिए आदर्श नियम भी बनाए गए हैं। छत्ताीसगढ़ में इन नियमों पर कार्रवाई करने के लिए तैयारी शुरू हो चुकी है।

इस कानून में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा एक किलोमीटर के अन्दर तथा पूर्व माध्यमिक शिक्षा की सुविधा तीन किलोमीटर के अन्दर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

कानून के तहत प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों के सभी बच्चों को नि:शुल्क पाठयपुस्तक और गणवेश देने की व्यवस्था की जाएगी। इसी प्रकार नि:शक्त बच्चो को नि:शुल्क विशेष प्रशिक्षण और सुरक्षा के लिए जरूरी सामग्री दी जाएगी।

प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों में पूर्व में गठित तीन प्रकार की समितियों को सशक्त किया जाएगा।

इन समितियों में 75 प्रतिशत सदस्य स्कूली बच्चों के अभिभावकगण रहेंगे। 25 प्रतिशत सदस्य स्थानीय जनप्रतिनिधि, शिक्षक, शिक्षाविद् और स्कूली बच्चे शामिल रहेंगे। इन सभी वर्गों की 50 प्रतिशत संख्या महिलाओं की होगी।
        
उन्होंने बताया कि शिक्षा का अधिकार कानून के आदर्श नियमों की समस्त प्रक्रियाओं को शुरू करने के लिए तीन साल का समय दिया गया है। छत्तीसगढ़ में इन नियमों के पालन की प्रक्रिया पहले से प्रारंभ कर दी गयी है।

प्रदेश में 22 जून 2009 को एक दिवसीय महासर्वेक्षण अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत हर गांव में सर्वे कर अप्रवेशी और शाला त्यागी बच्चों की सम्पूर्ण जानकारी एकत्रित की गयी है।

06 से 14 वर्ष उम्र के सभी बच्चों का बायोडाटा तैयार करने के लिए माइक्रो प्लानिंग सभी गांवों की होगी।  इस प्लान के अन्तर्गत प्रदेश के सभी गांवों में सर्वेक्षण करके इस उम्र के बच्चों का बायोडाटा तैयार किया जाएगा।

इसके लिए विकासखंड मुख्यालयों, जिला मुख्यालयों और राजधानी रायपुर में पृथक से सेल बनाए जाएंगे। माइक्रो प्लान में सभी बच्चों की गांव वार फाईल बनाई जाएगी।

एक फाईल संबंधित गांव में रहेगी और दूसरी विकासखंड मुख्यालय में रखी जाएगी। इसके तहत 06 से 14 वर्ष उम्र के शाला अप्रवेशी बच्चों को सामुदायिक सहभागिता से स्कूल में दाखिला दिलाने की कार्ययोजना बनेगी।
               
उन्होंने बताया कि शिक्षा का अधिकार कानून में प्रशिक्षित शिक्षकों की व्यवस्था करने विशेष जोर दिया गया है। छत्तीसगढ़ में इसकी भी तैयारी शुरू हो गयी है।

छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय और पंडित सुन्दर लाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा रही है।

प्रदेश के सभी प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक स्कूलों में प्रधान अध्यापकों के लिए कक्ष अलग से बनाए जाएंगे। इस वर्ष केन्द्र सरकार द्वारा सर्वशिक्षा अभियान के तहत तीन हजार प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों में प्रधान अध्यापक कक्ष सह स्टोर रूम बनाने की स्वीकृति दी जा चुकी है।
         
आठवीं कक्षा तक सभी पाठयक्रम बच्चों पर केन्द्रित होगा। इसमें कक्षाओं में पढ़ाई का तीस प्रतिशत व्याख्यान आधारित रहेगा। शेष सत्तर प्रतिशत पढ़ाई क्रियात्मक गतिविधियों से जुड़ी रहेगी।

राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त गैर शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को एक निर्धारित प्रपत्र में जिला शिक्षा अधिकारी को जानकारी देना होगा।

इसमें संबंधित विद्यालय के लिए उपलब्ध आधारभूत संरचना, शिक्षकों की संख्या, शिक्षकों की योग्यता आदि की जानकारी शामिल रहेगी।

36गढ़ डाट इन








 

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