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Last Updated: Wed, 08 Feb 2012 18:25:25 +0530

Tue, 30 Mar 2010 20:20:00 +0000

पथरीली जमीन पर लहलहायी धान की फसल



छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के गोपलिन चुआ गांव में पांच आदिवासी परिवारों ने लगन और कड़ी मेहनत से अपनी 9 एकड़ की बेकार पड़ी पथरीली बंजर जमीन को न सिर्फ खेती योग्य बना दिया है बल्कि वे इसमें धान, गेहूं के साथ सब्जी की फसल भी लेने लगे हैं।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,30 मार्च(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के गोपलिन चुआ गांव में पांच आदिवासी परिवारों ने लगन और कड़ी मेहनत से अपनी 9 एकड़ की बेकार पड़ी पथरीली  बंजर जमीन को न सिर्फ खेती योग्य बना दिया है बल्कि वे इसमें धान, गेहूं के साथ सब्जी की फसल भी लेने लगे हैं।

यह सब हुआ छत्तीसगढ़ सरकार की ग्रामीण गरीबी उन्मूलन योजना नवा अंजोर से जिसमें नलकूप खनन के लिए मिले 85 हजार रूपए की आर्थिक सहायता से उपलब्ध सिंचाई सुविधा से इन आदिवासी परिवारों के जीवन-यापन का स्तर ही बदल गया है।

ये परिवार अपनी भूमि में खाने योग्य अनाज पैदा करने के साथ ही सब्जी के उत्पादन से आर्थिक समृद्वि की ओर चल पड़े है।

गोपलिन चुआ गांव के आदिवासी परिवार के सदस्य सामसाय, मनसाय, श्यामसिंह, पुरूषोत्तम आदि हलबा गोंड जाति के हैं।

इन सभी ने नवा अंजोर योजना में समहित समूह के माध्यम से अपनी पथरीली जमीन में नलकूप खनन करने का निर्णय लिया और अपनी जमीन पर नलकूप खनन का कार्य कराया।

इनके 225 फीट गहरे नलकूप में तीन हार्स पावर की मोटर लगातार चलती रहती है जिससे इन आदिवासी परिवारों के खेत में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल जाता है।

ये आदिवासी अपने खेतों में गेहूं और धान की फसल के साथ ही टमाटर, बैंगन, बरबट्टी, मिर्च, ककड़ी, लौकी, तुमा की खेती कर रहे हैं जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी मिल जाती है।

36गढ़ डाट इन







 

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