मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि भू-जल संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। आने वाले कल के लिए आज पानी बचाना और हर प्रकार के जलस्त्रोत को साफ-सुथरा और सुरक्षित रखना हम सबके लिए बहुत जरूरी हो गया है।
रायपुर,8 जून(36गढ़ डाट इन) मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि भू-जल संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। आने वाले कल के लिए आज पानी बचाना और हर प्रकार के जलस्त्रोत को साफ-सुथरा और सुरक्षित रखना हम सबके लिए बहुत जरूरी हो गया है।
मुख्यमंत्री ने आज सवेरे महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखण्ड में ग्राम पंचायत सिंघोड़ा के आश्रित गांव पलसाभाड़ी में भू-जल संवर्धन महाअभियान के तहत श्रमदान के दौरान ग्रामीणों से चर्चा करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमदान वास्तव में हमारी भारतीय संस्कृति की एक पुरानी और महत्वपूर्ण परम्परा है, जो आज विलुप्त होती जा रही है। इसे फिर से शुरू करने की जरूरत है। यह एक महायज्ञ के समान है।
उल्लेखनीय है कि सिघोड़ा के सिचांई तालाब का पानी रिसकर पलसाभाड़ी स्थित इन दोनों तालाबों में पहुंचता है, लेकिन गर्मियों में वहां निस्तार की समस्या खड़ी हो जाती है।
मुख्यमंत्री ने श्रमदान के मौके पर उम्मीद जताई की जिस पलसाभाड़ी गांव में गर्मी के मौसम में भू-जल स्तर तीन सौ से चार सौ फीट तक नीचे चला जाता है, वहां इस तालाब के गहरीकरण के बाद जमीन के नीचे पानी का लेबल बढ़ेगा।
इसके फलस्वरूप हैंडपम्पों और कुंओं के जल स्तर में भी वृध्दि होगी। गांव के सभी लोगों को पेयजल और निस्तार के लिए साल भर पर्याप्त पानी मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने यह जानकर प्रसन्नता जताई कि इन दोनों तालाबों के गहरीकरण से न केवल पलसाभाड़ी बल्कि ग्राम सागरपाली, लखनपुर, सिघोड़ा और खरखरी के किसानों को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
डॉ. सिंह ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को पलसाभाड़ी तालाब की मेड़ और उलट को पक्का बनाने के लिए पिंचिंग करवाने के भी निर्देश दिए। डॉ. सिंह ने कहा कि यह कार्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर वहां सागौन और पीपल के पौधे भी लगाए। उन्होंने ग्रामीणों से तालाबों के किनारे हरियाली और शीतल छाया के लिए वृक्षारोपण करने का भी आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने गांव के इन विशाल तालाबों को बचाने और उनके गहरीकरण के लिए ग्रामीणों द्वारा ली जा रही दिलचस्पी की प्रशंसा की। डॉ. सिंह ने ग्रामीणों से चर्चा करते हुए यह भी कहा कि मानसून बहुत नजदीक आ गया है।
आगामी बरसात के मौसम में हम सब को गांव का पानी गांव में और खेत का पानी खेत में रोकने का प्रयास करना होगा, ताकि भू-जल संरक्षण और पानी बचाओ महाअभियान का उद्देश्य पूरा हो सके।
उल्लेखनीय है कि श्रमदान में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री आज सवेरे राजधानी रायपुर से हेलीकॉप्टर द्वारा पलसाभाड़ी पहुंचे, जहां लगभग साढ़े तीन हजार ग्रामीण श्रमदान में उनके सहभागी बने।
इस अवसर पर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री और महासमुंद जिले के प्रभारी श्री चंद्रशेखर साहू, क्षेत्र के लोकसभा सांसद श्री चंदूलाल साहू, सरायपाली के विधायक डॉ. हरिदास भारद्वाज और जिला पंचायत महासमुंद की अध्यक्ष श्रीमती सरला कोसरिया सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के पंच-सरपंचों, ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुध्द नागरिकों ने भी मुख्यमंत्री के साथ श्रमदान में हिस्सा लिया।
श्रमदान के इस महा यज्ञ के सुचारू संचालन के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाज सेवी संस्थाओं और व्यवसायिक संगठनों द्वारा भी उत्साह के साथ अपना योगदान दिया जा रहा है।
36गढ़ डाट इन