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Last Updated: Thu, 09 Feb 2012 04:21:59 +0530

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Thu, 10 Jun 2010 21:23:00 +0000

नक्सल हिंसा के कारण शिक्षा व्यवस्था गंभीर रूप से बाधित



प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने केन्द्र से मांगा विशेष पैकेज केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री सिब्बल के साथ नई दिल्ली में हुई बैठक ।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,10 जून(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश के नक्सल प्रभावित बस्तर, नारायणपुर, दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा), बीजापुर, उत्तर बस्तर (कांकेर) और राजनांदगांव जिले में शिक्षा के प्रसार के लिए विशेष पैकेज घोषित करने की मांग केन्द्र शासन से की है।

श्री अग्रवाल ने आज नई दिल्ली में शास्त्री भवन में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री कपिल सिब्बल के साथ आयोजित बैठक में बिन्दुवार विभिन्न मांगों के सबंध में पत्र सौंप कर कार्रवाई करने आग्रह किया।

केन्द्रीय मंत्री श्री सिब्बल ने बैठक में उपस्थित मानव संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों को इस दिशा में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार कानून 2009 के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश शासन द्वारा की गई तैयारियों की जानकारी दी और शिक्षा के प्रसार में हो रही कठिनाइयों और समस्याओं की ओर केन्द्रीय मंत्री का घ्यान आकृष्ट किया।

बैठक में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री श्रीमती डी. पुरन्देश्वरी, छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा सचिव श्री सुनील कुजूर, संचालक लोक शिक्षण संचालनालय श्री के.आर. पिस्दा भी उपस्थित थे।

श्री अग्रवाल ने पत्र में कहा है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों की हिंसक गतिविधियों के कारण वहां की शिक्षा व्यवस्था गंभीर रूप से बाधित हुई है।

बड़ी संख्या में शाला भवन ध्वस्त कर दिए गए हैं जिसके कारण प्रभावित क्षेत्रों के गांवों में बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षक भी जान के भय से शाला जाने से कतराते हैं।

नक्सली गतिविधियों के कारण नये स्वीकृत शाला भवनों के निर्माण में भी कठिनाई हो रही है। श्री अग्रवाल ने बैठक में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विशेष क्षेत्र मानकर शिक्षा के प्रसार के लिए नीतिगत निर्णय लेने का आग्रह किया।

उन्होंने पत्र में कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में विकासखण्ड मुख्यालयों, पुलिस थानों मुख्यालयों तथा मुख्य सड़कों से लगे गांवों में पांच-पांच सौ सीटर विशेष स्कूल संचालित किए जाएं ताकि आसपास के गांवों बच्चे इन स्कूलों में अध्ययन कर सकें।

ऐसे स्कूलों में बच्चों के लिए साल भर आवासीय सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। इन स्कूलों के शिक्षकों के लिए आवास गृह भी बनाए जाएं। स्कूल संचालन व भवन निर्माण के लिए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य योजना बनायी जाए।

नक्सल प्रभावित जिलों के लिए शिक्षा के प्रसार की हर गतिविधि की अलग से इकाई लागत निर्धारित की जाए। शिक्षकों को वेतन के अलावा अलग से प्रोत्साहन राशि दी जाए और उनको विशेष बीमा सुरक्षा के दायरे में भी लाया जाए।

श्री अग्रवाल ने बैठक में श्री सिब्बल से इस विषय पर चर्चा में कहा कि प्रदेश शासन द्वारा उपलब्ध संसाधनों में शिक्षा के प्रसार के लिए संकल्पित होकर शैक्षिक क्षेत्र में सुदृढ़ तंत्र की स्थापना के लिए कार्य किया जा रहा है, ताकि प्रदेश का हर बच्चा शिक्षा की  गतिविधियों से जुड़कर एक कुशल मानव संसाधन के रूप में परिपक्व हो सके।

राज्य शासन द्वारा शैक्षणिक संस्थाओं में अधोसंरचनाएं विकसित करने के कार्य लगातार किए जा रहे हैं। राज्य में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विद्यालय स्थापित करने का कार्य लगभग पूर्ण हो गया है।

अब जनसंख्या बढ़ने पर ही ऐसे नये विद्यालय खोले जाएंगे। माध्यमिक शिक्षा के लोकव्यापीकरण के अन्तर्गत व्यापक सर्वे कर आवश्यक माध्यमिक विद्यालयों का आंकलन किया गया है।

वर्तमान में राज्य में स्कूली बच्चों की संख्या करीब 56 लाख है। सभी विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राज्य में प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में एक लाख 82 हजार 997 शिक्षक के पद स्वीकृत है।

शिक्षकों के नये सेट-अप अनुसार विद्यार्थियों और शिक्षकों की संख्या का 40 अनुपात 01 है। छत्तीसगढ़ में प्रत्येक प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय के लिए प्रधान अध्यापक के पद स्वीकृत किए गए है। शैक्षणिक मापदण्डों के संदर्भ में छत्तीसगढ़ प्रदेश की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में संतोषप्रद है।

नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में दिए गए प्रावधानों के संदर्भ में भी छत्तीसगढ़ अच्छी स्थिति में है, फिर भी इन प्रावधानों के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए मैदानी कार्यालयों को निरंतर पदों के आंकलन हेतु निर्देश जारी किए गए हैं।

श्री अग्रवाल ने केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 2.47 प्रतिशत् की दर से शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं अत: नये पदों की स्थापना एवं सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों के पदों को मिलाकर लगभग 30 हजार पद वर्तमान में रिक्त हैं, यद्यपि राज्य में इन पदों को भरने के लिए प्रक्रिया चल रही है।

प्रदेश में लगभग 28 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाना है। राज्य में इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा था, परन्तु राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा इसकी क्षमता पर रोक लगाए जाने से प्रशिक्षण की कार्रवाई धीमी हो गई है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि राज्य में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की निरंतरता एक समस्या के रूप में सामने आयी है। इसके बाद भी शैक्षणिक गतिविधियों को निर्बाध रूप से संचालित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विकासखण्ड मुख्यालयों पर 500-500 सीटर विशेष स्कूल संचालित किए जाएं, जिसमें शिक्षक आवास गृह एवं बच्चों को आवासीय सुविधा प्राप्त हो व इन स्थानों पर भवन निर्माण के लिए स्थानीय आवश्यकता अनुरूप योजना बनाई जाए।

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत् मॉडल स्कूल एवं गर्ल्स हॉस्टल भवन की स्वीकृति दी गई है, जो केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के 2007 के प्रचलित एस.ओ.आर. पर आधारित है, यह तीन वर्ष पुरानी है।

उक्त दर पर आज निर्धारित मापदण्ड के अनुरूप भवन बनाया जाना संभव नहीं है, जबकि विगत् 3 वर्षों में भवन निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्रियों की दर डेढ़ गुनी बढ़ गई है। अत: भवन की ईकाई लागत बढ़ायी जाए।

इसके साथ ही पुरानी स्वीकृतियों को पुनरीक्षित करने की आवश्यकता है। प्रदेश में खोले जाने वाले मॉडल स्कूलों का कार्यक्षेत्र विकासखण्ड है, जहां पर 25 से 30 किलोमीटर दूर से भी बच्चे अध्ययन करेंगे।

उक्त विद्यालयों में कोई आवासीय सुविधा नहीं है ऐसी परिस्थिति में बालक एवं बालिकाओं के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। मॉडल स्कूल परिसरों में ही बालक-बालिकाओं के लिए अलग अलग दो-दो सौ सीटर आवासीय सुविधायुक्त छात्रावास प्रारंभ किया जाए।

शेष 10 जिलों में से अधिकांश जिले नक्सल प्रभावित जिले हैं जहां साक्षरता कार्यक्रम का विशेष महत्व है। केन्द्र शासन से अपेक्षा है कि राज्य के शेष 10 जिलों में भी कार्यक्रम की स्वीकृति शीघ्र प्रदान की जाए।

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