Thu, 10 Jun 2010 21:31:00 +0000 बस्तर के स्कूलों में बनेंगे वनौषधि-क्लब और हर्बल-गार्डन
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर जिले के स्कूलों में अब ''वनौषधि-क्लब'' और ''हर्बल-गार्डन'' बनेंगे।
36गढ़ डाट इन
जगदलपुर,10 जून(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर जिले के स्कूलों में अब ''वनौषधि-क्लब'' और ''हर्बल-गार्डन'' बनेंगे।
जन-जन के लिए विज्ञान पर केन्द्रित ''वनौषधि-क्लब'' और ''हर्बल-गार्डन'' बनाये जाने हेतु कृषि, उद्यानिकी, शिक्षा, वन और आदिमजाति अनुसूचित जाति कल्याण विभाग तथा स्वयंसेवी संस्था छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त प्रयास से यह कार्य किया जाएगा।
स्कूलों में औषधि पौधों को लोकप्रिय बनाने के लिए बस्तर कलेक्टर की विशेष और अभिनव पहल पर यह कार्य किया जा रहा है।
बस्तर संभाग के आयुक्त श्री मनोज कुमार पिंगुआ ने स्कूलों में औषधीय पौधों को लोकप्रिय बनाने की पहल को एक सराहनीय प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे, हमारे आसपास, बिखरे प्रकृति के अनमोल खजाने को पहचान सकें, कि कौन सा पौधा किस रोग में काम आता है।
यह जान सके तों पुरखों के विलुप्त होते ज्ञान को बचाने में सफलता मिलेगी। श्री पिंगुआ ने ''वनौषधि-क्लब'' और ''हर्बल-गार्डन'' स्कूलों में स्थापित किए जाने के संदर्भ में यह संदेश कि अभिव्यक्ति देते हुए कहा है कि मनुष्य और पेड़-पौधे एक दूसरे के सहचर हैं और दोनों के मेलजोल से दोनों को ही फायदा होता है।
हम पेड़-पौधों से अपनी जरूरत के हिसाब से औषधियां लें और बदलें में उन्हें रोपें। औषधीय पौधों को बड़ा करें, फैलाएं और उनका संरक्षण करें।
इससे न सिर्फ स्कूल का पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि विद्यार्थी भी प्रोत्साहित होकर बिगड़ते पर्यावरण् को बचाने आगे आएंगे और जल, जंगल, जमीन से हमारे पवित्र रिश्ते को दिल की गहराईयों से समझ सकें।
संभागायुक्त ने बस्तर कलेक्टर की इस पहल का स्वागत करते हुए यह आशा व्यक्त की है कि हमारे विद्यार्थी वनौषधि-क्लब और हर्बल-गार्डन बनाकर परम्परागत वैद्यों का आदर करेंगे, सीखेंगे और वनौषधि के ज्ञान को सहेजकर उसे अगली पीढ़ी को सौंपेगे।
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