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Last Updated: Wed, 08 Feb 2012 18:30:13 +0530

Thu, 15 Jul 2010 00:06:00 +0000

लोकतंत्र की रक्षा के लिए नक्सलियों से लड़ाई अनिवार्य: मुख्यमंत्री



छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने एक बार फिर कहा है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए नक्सलियों से आर-पार की लड़ाई अनिवार्य हो गयी है।
36गढ़ डाट इन
रायपुर, 14 जुलाई(36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ.  रमन सिंह ने एक बार फिर कहा है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए नक्सलियों से आर-पार की लड़ाई अनिवार्य हो गयी है।

डॉ.  रमन सिंह ने कहा कि जब तक नक्सलवादी बन्दूक छोड़ कर भारतीय संविधान पर आस्था नहीं जताते और लोकतांत्रिक तौर-तरीकों को नहीं अपनाते, तब तक उनसे बातचीत निरर्थक ही रहेगी।

डॉ. रमन सिंह ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री डाॅ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित  देश के नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की विशेष बैठक में यह भी दोहराया कि नक्सलवाद और आतंकवाद एक ही सिक्के के दो पहलू है।

डॉ. रमन सिंह ने बैठक में राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के दो नये जिलों बीजापुर और नारायणपुर तथा तीन नये पुलिस जिलों - बलरामपुर, सूरजपुर और गरियाबंद के लिए प्रत्येक जिले के हिसाब से दो सौ करोड़ रूपए के विशेष पैकेज की भी मांग रखी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवादियों, उनके सहयोगियों और हमदर्दों की कथनी और करनी को जनता के समाने लाने का जो सिलसिला छत्तीसगढ़ में छह साल पहले शुरू हुआ था, उसके कारण अब नक्सलियों का मुखौटा पूरी तरह उतर चुका है।

उनकी हिंसक गतिविधियों से यह स्पष्ट हो गया है कि माओवादियों द्वारा आम आदमी के हित में बातें करना एक छलावा है। हकीकत यह है कि उनके द्वारा आम आदमी ही मारा जा रहा है।

विकास की हर इकाई को ध्वस्त किया जा रहा है। इसलिए हमने नक्सलियों सख्ती से निपटने की नीति बनायी है। हमने सरकार में आते ही यह मन बना लिया था कि उनसे आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी।

देश को, उसके संवैधानिक ढांचे को, लोकतंत्र को और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए यह अनिवार्य है। डाॅ. रमन सिंह ने यह भी कहा कि अब देश को इस दुविधा से उबरना होगा कि यह किसी राज्य विशेष अंदरूनी मामला है।

प्रधानमंत्री ने भी इसे देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है और हमने भी इससे निबटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित रणनीति की जरूरत बतायी है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की बैठक में अपनी बात रखते हुए नक्सलियों और उनके हमदर्द कुछ बुद्धिजीवियों के इस दुष्प्रचार का जोरदार शब्दों में खण्डन किया कि बस्तर में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और निजी उद्योगपतियों को मूल्यवान खनिजों से भरी जमीनें दी जाती है।

डॉ. रमन सिंह ने बैठक में कहा कि वस्तु स्थिति यह है कि पिछले 50 साल में कोई भी बहुराष्ट्रीय कम्पनी एक किलो लौह अयस्क भी नहीं ले गयी है।

लगभग 40 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले बस्तर अंचल में सिर्फ एक प्रतिशत जमीन खनिजों के उत्खनन और प्रासपेक्टिंग के लिए दी गयी है, वह भी सिर्फ राष्ट्रीय खनिज विकास निगम, भारतीय इस्पात प्राधिकरण और छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम जैसे सार्वजनिक उपक्रमों को।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि वास्तव में यह दुःख का विषय है कि नक्सलियों की हिंसक और अराजक पृष्ठभूमि के बावजूद आज भी कुछ लोग उनकी मंशा को लेकर भ्रम की स्थिति में है।

36गढ़ डाट इन







 

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