Mon, 19 Jul 2010 23:36:00 +0000 प्रदेश का पहला पोषण पुनर्वास केन्द्र जांजगीर में शुरू
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने कल इस केन्द्र का शुभारंभ किया। उन्होंने अस्पताल में बच्चों को पोषण आहार भी खिलाया।
36गढ़ डाट इन
रायपुर 19 जुलाई(36गढ़ डाट इन) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने कल इस केन्द्र का शुभारंभ किया। उन्होंने अस्पताल में बच्चों को पोषण आहार भी खिलाया।
लोकसभा सांसद श्रीमती कमला देवी पाटले और विधायक श्री नारायण चंदेल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
श्री अग्रवाल ने शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में बच्चों में कुपोषण की दर अधिक है। 1338बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए ही प्रदेश के बीस स्वास्थ्य केन्द्रों में पोषण पुनर्वास केन्द्रों की स्थापना की जा रही है।
इसी के तहत जांजगीर में पोषण पुनर्वास केन्द्र की स्थापना की गई है। इन केन्द्रों के माध्यम से कुपोषण दूर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि वे बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करें और कुपोषण के शिकार बच्चों को समुचित पोषण आहार प्रदान करें।
उन्होंने कहा कि कुपोषित बच्चों को जरूरत पड़ने पर उन्हें बड़े अस्पतालों में रिफर किया जाए। रिफर किए जाने की स्थिति में बच्चे को लाने-ले-जाने का खर्चा भी राज्य शासन द्वारा दिया जाएगा।
श्री अग्रवाल ने कहा कि बच्चों के समुचित देखभाल के लिए प्रत्येक केन्द्र में पांच-पांच बिस्तर कुपोषित बच्चों के लिए आरक्षित किए जा रहे है। इसके साथ ही बच्चों को सही मात्रा में पोषण आहार प्रदान करने के लिए आहार विशेषज्ञों और रसोईयों की भी भर्ती की जा रही है।
इन केन्द्रों में बच्चों के साथ उनकी माताओं को भी पोषण आहार प्रदान किया जाएगा। पोषण पुनर्वास केन्द्र शुरू करने के लिए आवश्यक राशि संबंधित अस्पतालों को भेज दी गई है।
ज्ञातव्य है कि जांजगीर के अलावा शासकीय जिला अस्पताल अम्बिकापुर,
बिलासपुर, धमतरी, दंतेवाड़ा, दुर्ग, जशपुर, कांकेर, कवर्धा, कोरबा, कोरिया,
महासमुंद, रायगढ़, रायपुर और जिला अस्पताल राजनांदगांव में भी पोषण केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पेण्ड्रारोड, बीजापुर, नारायणपुर, कोण्डागांव और गरियाबंद भी पोषण पुनर्वास केन्द्र के लिए चयन किया गया है।
उपस्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों के वजन, कुपोषण के लक्षण और परीक्षण के आधार पर कुपोषित बच्चों को चिन्हांकित किया जाएगा।
आंगनबाड़ी केन्द्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन किए जाने पर उन्हें प्रति प्रकरण पचास रूपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। बच्चों के चिन्हांकन के बाद उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा।
योजना के तहत कुपोषित बच्चों को प्रथम संदर्भन इकाई याने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भेजे जाने पर बच्चे के अभिभावक को आने-जाने के लिए दो सौ रूपए, कुपोषित बच्चों को द्वितीय संदर्भन इकाई याने जिला अस्पताल भेजे जाने पर 750 रूपए आने-जाने का खर्चा दिया जाएगा।
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