Wed, 12 Oct 2011 19:21:00 +0000 आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए आपदा का पूर्व आकलन आवश्यक
प्राकृतिक या मानव निर्मित किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर और राज्य एवं जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बनाया गया है।
36गढ़ डाट इन
रायपुर, 12 अक्टूबर(36गढ़ डाट इन) प्राकृतिक या मानव निर्मित किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर और राज्य एवं जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बनाया गया है।
देश में आपदा प्रबंधन नीति 2009 भी घोषित की गई है। छत्तीसगढ़ में आपदा प्रबंधन के लिए जिला स्तर पर कार्य योजना बनाई जा रही है।
इस आशय की जानकारी आज यहां छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी में 'राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस' के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दी गई। मुख्य वक्ता के रूप में आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ श्री एन.वी. देशपांडे ने विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम में सलाहकार, प्रशासन अकादमी श्री चंद्रहास बेहार, संयुक्त संचालक, प्रशासन अकादमी श्री जे.एस. दीक्षित सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। श्री देशपांडे ने कहा कि प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, आग, भूकंप, भू-स्खलन और मानव निर्मित आपदाएं जैसे औद्योगिक दुर्घटना ,सड़क दुर्घटना आदि होती हैं।
आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के लागू होने के बाद राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य स्तर पर प्राधिकरण गठित किया गया है।
उन्होने कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए पूर्व से आपदा का आकलन करना चाहिए और उसे न्यून करने के उपायों पर ध्यान देना चाहिए।
इसके लिए नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि विकास के साथ-साथ आपदा न्यूनीकरण पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
इसके लिए शासकीय कर्मियों, आम नागरिको सभी में जागरूकता लाना आवश्यक है। इससे बचने के लिए पूर्वाभ्यास भी नियमित होना चाहिए।
आज समाज में जोखिम निवारण संस्कृति विकसित करने की जरूरत है,ताकि आपदा के वक्त सभी तैयार रहें। उन्होने छत्तीसगढ़ के संदर्भ में बताया कि यहां का उत्तर पश्चिम क्षेत्र और धुर दक्षिण क्षेत्र भूकंप संवेदनशील क्षेत्र में आते हैं।
इन क्षेत्रों में भवन, पुल आदि के निर्माण में भूकंप रोधी तकनीक का प्रयोग करना चाहिए। शहरी क्षेत्रों में मास्टर प्लान बनाते समय आपदा प्रबंधन का मास्टर प्लान भी बनाना चाहिए जिसमें जोखिम वाले क्षेत्रों का वर्णन हो और इससे निपटने के लिए कार्य योजना बनाई जाए।
कार्यक्रम को श्री चंद्रहास बेहार और श्री जे.एस.दीक्षित ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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