Mon, 23 Jun 2008 13:16:00 +0000 बस्तर में अब तक नहीं पहुंचे मानसून
प्री मानसून बारिश के बाद बस्तर में प्रतिदिन भारी उमस के साथ बादल छाये रहते हैं किन्तु सामान्यत:प्रतिवर्ष 10 जून तक पधार जाने वाले श्रीमान मानसून का आगमन जून के अंतिम सप्ताह तक भी नहीं हो पा रहा है।
धर्मेंेद्र महापात्र
जगदलपुर,22 जून(36गढ डाट इन) प्री मानसून बारिश के बाद बस्तर में प्रतिदिन भारी उमस के साथ बादल छाये रहते हैं किन्तु सामान्यत:प्रतिवर्ष 10 जून तक पधार जाने वाले श्रीमान मानसून का आगमन जून के अंतिम सप्ताह तक भी नहीं हो पा रहा है।
खेतिहर किसानों ने जहां खेत में जुताई कर बुआई की तैयारी में है तथा खेतों में खाद भी डाल दिया गया है। वहीं किसान की नजरें उमडघुमड कर आए, बिन बरसे बादलों की ओर लगी हुई है।
समय पर वरषा न होने के कारण बस्तर में धान तथा गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है।
संपन्न किसान सोसायटियों में अनाज बेचने अपने व्यक्तिगत प्रयास से पंप तथा कुंए लगवा कर हाईब्रीड दुबराज तथा बासमती की फसल ले लेते हैं किन्तु आम किसान टकटकी लगाकर बादलों को निहारता रह जाता है इस हेतु शासन को प्रयास कर सिंचाई के साधन बढाये जाने हेतु किसानों को मोटर तथा पंप के लिए ऋण दिया जाना चाहिए।
मानसून के समय पर न पहुंच पाने का कारण वनों की अंधाधुंध कटाई भी है। उदाहरण के लिए दंतेवाडा तथा सुकमा क्षेत्र में जहां आज भी घने जंगल हैं तथा दिन में भी रात का धोखा होता है।
प्रतिदिन दोपहर के बाद उमडघुमड कर वरषा होती है वे भी दिन थे जब बस्तर में साल भर बारिश होती थी तथा तीन-तीन, चार-चार दिनों तक झडी लगी रहती थी, वरषा न होने का कारण कांक्रीट के बढते जंगल तथा वनों की अंधाधुंध कटाई है जो आधुनिक समाज की देन है इसका खामियाजा भी आने वाली पीढी को उठाना पडेगा जबकि नए पौधों के वृक्षारोपण का कार्य अब युद्घस्तर पर नई पीढी को सौंपना चाहिए।
36गढ डाट इन
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