Fri, 26 Mar 2010 23:27:00 +0000 ग्रामीणों ने जंगल को बनाया हरा भरा
छत्तीसगढ़ के महासमुन्द जिले के ग्राम मुड़मार का जंगल जो कभी अवैध कटाई, उत्खनन तथा अनियंत्रित चराई के कारण वीरान होता जा रहा था अब ग्रामीणों की सक्रियता एवं जागरूकता के कारण मनमोहक हरियाली और ताजी हवा में फूलों की खुशबू लिए जंगल में परिवर्तित हो गया है।
36गढ़ डाट इन
रायपुर, 26 मार्च (36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के महासमुन्द जिले के ग्राम मुड़मार का जंगल जो कभी अवैध कटाई, उत्खनन तथा अनियंत्रित चराई के कारण वीरान होता जा रहा था अब ग्रामीणों की सक्रियता एवं जागरूकता के कारण मनमोहक हरियाली और ताजी हवा में फूलों की खुशबू लिए जंगल में परिवर्तित हो गया है।
महासमुन्द से छ: किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बहुल मुड़मार गांव के ग्रामीण वनग्राम समिति बनाकर जंगल की रक्षा के साथ जंगल को हरा भरा बनाने में जुट गए हैं।
अस्सी की दशक के समय शहर के करीब होने के कारण्ा मुड़मार का वन क्षेत्र पूरी तरह से असुरक्षित था। अवैध कटाई के कारण समूचा जंगल ठूंठ में बदलने लगा था।
ऐसे समय में ग्रामीणों को जलाऊ लकड़ी मिलना मुश्किल हो गया था। यह सब देखकर बुजुर्गो की सलाह पर ग्रामीणों ने वन विभाग के सहयोग से भावी पीढ़ी के लिए जंगल बचाने का संकल्प लिया तथा वन ग्राम समिति बनाकर तीन सौ हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगल की रक्षा में जुट गए।
इसका परिणाम यह हुआ कि गांव में अब जंगल तो दूर निजी जमीन पर किसी भी प्रकार के पेड़ काटने की सख्त मनाही है। जरूरत के अनुसार पेड़ काटे जाते हैं तो उसका सामूहिक रूप में उपयोग किया जाता है।
ग्रामवासी बाहरी लोगों से जंगल को बचाने बारी-बारी से रात में जंगल में गश्त लगाते हैं। मुड़मार ग्राम के लोगों की मेहनत से जंगल वापस हरियाली से भरपूर जंगल में बदल गया है तथा यहां चार, हर्रा, बेहरा, महुआ, तेंदूपता तथा वनोषधि से भरपूर अनेक पेड़ पौधे सुरक्षित पनप रहे हैं।
मुड़मार के जंगल की देखभाल करते ग्रामवासियों में स्वयं के विकास के प्रति भी गंभीरता आयी है जिसके परिणाम से तथा ग्राम वन समिति की सक्रियता से जनभागीदारी योजना के तहत गांव में तीन टयूबवेल तथा एक स्टापडेम बन गया है।
इससे गांव में लगभग 50 एकड़ भूमि में सिंचाई हो रही है जिससे किसान खरीफ मौसम में धान की खेती तथा रबी में धान के अलावा गेहूं, चना, सरसों, सूरजमुखी की सामूहिक खेती कर अतिरिक्त लाभ कमा रहे हैं।
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