Sat, 05 Jun 2010 20:48:00 +0000 पर्यावरण संरक्षण के लिए जन-चेतना जरूरी
विश्व पर्यावरण दिवस पर आज यहां पंडरी स्थित वन-अनुसंधान एवं विस्तार कार्यालय के सभाकक्ष में 'पर्यावरण सुधार में वनों का योगदान' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
36गढ़ डाट इन
रायपुर,5 जून(36गढ़ डाट इन) विश्व पर्यावरण दिवस पर आज यहां पंडरी स्थित वन-अनुसंधान एवं विस्तार कार्यालय के सभाकक्ष में 'पर्यावरण सुधार में वनों का योगदान' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी में विशेषज्ञों द्वारा कहा गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल वन विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए है। इस पर आज पूरी दुनिया चर्चा कर रही हैं।
विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए जन-जागरूकता को जरूरी बताया और इसके लिए विशेष प्रयास करने पर जोर दिया। इस अवसर पर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने और प्राकृतिक वन संपत्तियों और जीव-जंतुओं को बचाने का संदेश देने के लिए वन विभाग द्वारा निर्मित पोस्टर का विमोचन किया गया।
उल्लेखनीय है कि विभाग द्वारा विगत माह पर्यावरण सुधार में वनों का योगदान विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।
इसमें चयनित कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग के तीन-तीन प्रतिभागियों को आज की संगोष्ठी में प्रथम-द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया है।
प्रतियोगिता में कनिष्ठ वर्ग में पहला स्थान प्राप्त करने वाली कुमारी कुमुद यादव को नगद राशि के रूप में तीन हजार, द्वितीय स्थान पाने वाली कुमारी आरोही ग्वाल को दो हजार 500 रूपए और तृतीय स्थान पाने वाले श्री अक्षय पिल्ले को एक हजार रूपए की नगद राशि देकर सम्मानित किया जाएगा।
इसी प्रकार वरिष्ठ वर्ग में पहला स्थान पाने वाले श्री गिरीश चन्द्रपाल को दस हजार, द्वितीय स्थान पाने वाले डॉक्टर परेशनाथ पाल को नौ हजार और तृतीय स्थान पाने वाले श्री जितेन्द्र तिवारी को आठ हजार रूपए की नगद राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, वन विभाग के प्रमुख सचिव श्री पी.सी.द्रेलई, प्रधान मुख्य वनसंरक्षक श्री आर.के.शर्मा, राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री वीरेन्द्र शर्मा, राज्य लघुवनोंपज के प्रबंध संचालक श्री ए.के.सी., अपर मुख्य वनसंरक्षक श्री रामप्रकाश, डॉ. ए.ए.बोआज और श्री व्हीं. एस.सिलेकर और प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागी एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।
जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती वर्मा ने संगोष्ठी में कहा कि वायु, जल, ध्वनि, प्लास्टिक (पॉलीथीन) की रोकथाम के लिए शासन स्तर पर कार्य किया जा रहा है, लेकिन लोगों में जागरूकता आने पर यह कार्य आसानी से पुरा किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन काल में कम से कम एक पौधे लगाकर उनका संरक्षण संवर्धन करना चाहिए, तभी विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित संगोष्ठी सार्थक हो सकती है।
उन्होंने कहा कि जरूरत के लिए लोग पेड़ काटते थे, तो उसके बदले पांच पौधे भी लगाते थे। उन्हें संरक्षित और संवंर्धित करते थे, लेकिन समाज में ये भावना कम हो गयी है। हमें इस भावना को पुन: स्थापित करने की जरूरत है।
संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए श्री देलई ने कहा कि छत्तीसगढ़ के कुल क्षेत्रफल के 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आछादित है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य तेजी से औद्योगिक विकास तो करें, लेकिन पर्यावरण की अनदेखी ना हो।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण वनों तक सीमित नहीं है। इसमें समस्त जीव-जगत शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी में पर्यावरण की सभी पहलुओं पर चर्चा की गयी, जो सराहनीय है। उन्होने कहा कि पेड़ लगाने के अलावा रख-रखाव भी आवश्यक है।
इसके लिए समाज में जागरूकता लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कानून में वनों के संरक्षण के लिए वन विभाग के अधिकारियों को व्यापक अधिकार और कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है। पर्यावरण संरक्षण में वन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
उन्होंने कहा कि वनों को अवैध रूप से काटने वालों के विरूध्द सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रधान मुख्य वनसंरक्षक श्री शर्मा ने विगत माह आयोजित प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों को पर्यावरण सुधार में वनों का योगदान विषय पर जो लेख लिखे गए है, उसे आम लोगों तक ले जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाकर इस चुनौती का सामना किया जा सकता है। उन्होंने लोगों को अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाने का आह्वान किया। संगोष्ठी में कई वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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