इस गौरवशाली महोत्सव को आकर्षक और नया स्वरूप दिया जा रहा है। प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव की तैयारी के लिए कलेक्टर श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ने अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए हैं।
रायपुर 03 फरवरी (36गढ़ डाट इन) छत्तीसगढ़ के महासमुन्द जिले के ऐतिहासिक गांव सिरपुर में आगामी 10 फरवरी से शुरू हो रहे तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गयी हैं।
इस गौरवशाली महोत्सव को आकर्षक और नया स्वरूप दिया जा रहा है। प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव की तैयारी के लिए कलेक्टर श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ने अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक विशेषताओं से परिपूर्ण सिरपुर का पुराना नाम श्रीपुर था और इसे समृध्दि की नगरी भी कहा जाता था।
राज्य सरकार के सहयोग से सिरपुर महोत्सव विगत वर्ष 2006 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। यह भी उल्लेखनीय है कि पंचायत चुनाव की आचार संहिता को देखते हुए सिरपुर में महानदी के तट पर हर वर्ष माघ पूर्णिमा में मनाया जाने वाला तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव इस बार महाशिवरात्रि से दो दिन पहले आयोजित किया जा रहा है।
इतिहासकारों के अनुसार सिरपुर पांचवीं शताब्दी के मध्य दक्षिण कौसल की राजधानी रह चुका है। छठवीं शताब्दी में चीनी यात्री व्हेनसांग भी यहां आए थे।
यहां का प्रसिध्द लक्ष्मण मंदिर छठवीं शताब्दी में निर्मित भारत का सबसे पहले ईंटों से बना मंदिर है। यह मंदिर सोमवंशी राजा हर्षगुप्त की विधवा रानी बासटा देवी द्वारा बनवाया गया था। इस मंदिर के समीप ही ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का राम मंदिर है, जो भग्नावस्था में है।
इसके अलावा यहां सोमवंशी राजाओं की वंशावली को दर्शाने वाले अनेक दर्शनीय स्थल- गंधेश्वर महोदव मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, चण्डी मंदिर, स्वास्तिक विहार और कई प्राचीन शिलालेख हैं। यहां पर अनेक बौद्व मठ और विहार भी प्राप्त हुए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल के विशेष पहल पर स्थानीय लोगों की मांग पर वर्ष 2006 से सिरपुर महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव से सिरपुर को राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
महोत्सव के आयोजन के बाद से पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन में भी तेजी आयी है। लगभग दस नवीन स्थलों के उत्खनन से बड़े-बड़े शिव मंदिरों सहित विशेष रूप से पंचायतन शैली का मंदिर मिला है, जोकि पंचायतन शैली में निर्मित भारत का सबसे बड़ा मंदिर है।
इसके अलावा बौध्दिक स्तूप और राजप्रासाद भी नये उत्खनन में मिले हैं। तेजी से चल रहे उत्खनन के साथ ही सिरपुर में नयी सुविधाओं का विस्तार हुआ है, जिसके तहत पहुंच मार्गों और सिरपुर के भीतर नयी सड़कों का निर्माण हुआ है।
लक्ष्मण मंदिर के पास बच्चों के खेलने के लिए 'चिल्डरन पार्क' और विश्राम गृह तथा पर्यटकों के ठहरने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग- 6 के पास ग्राम कांपा में सर्वसुविधायुक्त टूरिस्ट मोटल निर्मित हो चुका है। पुरातात्विक महत्व के इस पर्यटक स्थल में वर्ष भर जापान, श्रीलंका, म्यानमार,तिब्बत और भूटान सहित विभिन्न देशों के पर्यटक आते रहते हैं।
इस महोत्सव की तिथि से अवगत कराने के लिए आगामी आठ फरवरी से मुनादी शुरू कर दी जाएगी। मुनादी के साथ ही लोक नर्तकों की टोलियां गांवों में घूम-घूमकर अपनी कला की प्रस्तृति भी देंगे।
सिरपुर महोत्सव के दौरान इस बार एक अलग से मंच बनाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है, जिसे मीना मंच कहा जाएगा और यहां डाक्यूमेन्ट्री फिल्म 'मीना' के माध्यम से लोगों को सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जाएगा।
साथ ही कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले किसानों को भी अपनी बात रखने का अवसर इस मंच से दिया जाएगा। महोत्सव के दौरान विभागीय स्टॉल भी लगाए जाएंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा स्टाल के माध्यम से कुपोषित बच्चों के पालकों को स्वास्थ्यवर्धक जानकारियां भी प्रदाय की जाएगी तथा महोत्सव में आए बच्चों का वजन भी मापा जाएगा।
(छत्तीसगढ़ के जन्सम्पर्क बिभाग के सौजन्य से )
36गढ़ डाट इन